सोमवार, 21 जनवरी 2013

आनंद बक्षी साहेब मेरी प्रेरणा हैं



फिल्म -अलग अलग 

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा  
बेमुरब्बत बेवफ़ा दुनिया है ये 
है यही दुनिया तो क्या दुनिया है ये 
क्या कमी थी दुश्मनों की 
क्या कमी थी दोस्तों की 
कभी दुश्मनों ने लूटा
कभी दोस्ती ने मारा             

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा।     (गीतकार  आनंद बक्षी )

दिल तो दिल है, दिल की कहें क्या 
कुछ कहें तो  भला, कुछ कहें क्या 
कहीं नाजनीं के मेले
तो कहीं सादगी के रेले
कभी नाजनीं ने लूटा
कभी सादगी ने मारा।    ( स्व रचित अंतरा  प्रेम फर्रुखाबादी )                         
                                

गिला मौत से नहीं है
मुझे जिन्दगी ने मारा 
कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा

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