सोमवार, 21 जनवरी 2013

आनंद बक्षी साहेब मेरी प्रेरणा हैं



फिल्म -अलग अलग 

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा  
बेमुरब्बत बेवफ़ा दुनिया है ये 
है यही दुनिया तो क्या दुनिया है ये 
क्या कमी थी दुश्मनों की 
क्या कमी थी दोस्तों की 
कभी दुश्मनों ने लूटा
कभी दोस्ती ने मारा             

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा।     (गीतकार  आनंद बक्षी )

दिल तो दिल है, दिल की कहें क्या 
कुछ कहें तो  भला, कुछ कहें क्या 
कहीं नाजनीं के मेले
तो कहीं सादगी के रेले
कभी नाजनीं ने लूटा
कभी सादगी ने मारा।    ( स्व रचित अंतरा  प्रेम फर्रुखाबादी )                         
                                

गिला मौत से नहीं है
मुझे जिन्दगी ने मारा 
कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा

बुधवार, 16 जनवरी 2013

लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं



लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं।
जिधर देखो उधर बेशर्म खड़े हैं।

बिना देखे इन्हें चैन ही न आये
दिल के हाथों में मजबूर बड़े हैं।

समझाओ तो समझाते ही नहीं
हो जाते एक दम चिकने घड़े हैं।
बेशर्म इतने कि मत पूँछो भाई
कुत्तों जैसी  कुत्तई पर अड़े हैं।

समाज चुपचाप है इन्हें देख के
तभी लड़कियों पे जुल्म बढ़े हैं।
वही लड़के छेड़ते लड़कियों को
जिसके घर में संस्कार सड़े हैं।

हम बेवफा हरगिज न थे





मंगलवार, 8 जनवरी 2013

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

दिल चुराकर नज़र चुराना ......



दिल  चुरा कर  नज़र चुराना,  ठीक नहीं होता। 
अपना बना कर फिर सताना, ठीक नहीं होता। 

निभा  सको जितने  उतने, वादे करना सीखो 
वादा  करके  मुकर  जाना,  ठीक  नहीं  होता।

दूर  रहना ही था तो  क्यों,  नज़दीक  में आये 
नज़दीक आकर  दूर जाना,  ठीक  नहीं होता।  

हँसा-हँसा कर दुनियां को, प्रेम पुण्य  कमाओ 
रुला रुला कर  पाप  कमाना, ठीक नहीं होता।