सोमवार, 9 दिसंबर 2013

स्वरचित अंतरा, ज़िंदगी एक नाटक है

 फ़िल्म - नाटक  - गीत कार आनंद बक्शी 

ज़िंदगी एक नाटक है  हम नाटक में काम करते हैं
पर्दा उठते ही पर्दा गिरते ही सबको सलाम  करते हैं 

खेल में कभी बजती हैं तालियां  
और कभी लोग देते हैं गलियां
भले बनते ही, बुरे बनते ही 
अपने नाम बदनाम करते हैं हम नाटक में काम करते हैं.
ज़िंदगी एक नाटक है 
हम नाटक में काम करते हैं

कभी कभी हम ख़ुशी को मनाते 
और  कभी  हम  दुखी  हो  जाते
क्या  कहें  कैसा, यह जहाँ  ऐसा, कभी दाम बिन दाम करते हैं.   (स्वरचित अंतरा - प्रेम फ़र्रुखाबादी)  
हम नाटक में काम करते हैं
ज़िंदगी एक नाटक है 
हम नाटक में काम करते हैं

बुधवार, 15 मई 2013

वफ़ादारी का दरवाजा हुआ बंद है

वफ़ादारी का दरवाजा हुआ बंद है। 
हर कोई आज बना हुआ जयचंद है।   

भाभियाँ तंग है आज कल जिन से 
या तो वो सास या फिर वो नन्द है। 

वही कविता आज कल सराहनीय  
जिन में बिंधा कोई न कोई छंद है।  
 
शरीर अपना यह कुछ नहीं है बस 
आत्मा कैद करने का एक फंद है।  

समझाने से भी जो न समझे सके 
वो उल्लू का पठ्ठा अक्ल का मंद है। 

जहाँ में वो ही जी सकता है दोस्त 
जिसका हौसला एक दम बुलंद है। 

मान मिले न मिले पर दाम मिले 
लालची तब ही होता रजामंद है। 

गुलाम कोई नहीं है तो बना डालो 
गुलाम आज कल सबकी पसंद है।

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

फिल्म : आपकी कसम ( गीतकार आनन्द बक्षी )

फिल्म : आपकी कसम ( गीतकार आनन्द बक्षी )

 जय जय शिव शंकर
काँटा लगे न कंकर
जो प्याला तेरे नाम का पिया
ओ~ गिर जाऊँगी, मैं मर जाऊँगी
जो तूने मुझे थाम न लिया
सो रब दी!

एक के दो दो के चार हमको तो दिखते हैं
ऐसा ही होता है जब दो दिल मिलते हैं
सर पे ज़मीं पाँव के नीचे है आसमान, हो~
सो रब दी~
जय जय शिव श,न्कर ...

कंधे पे सर रख के तुम मुझको सोने दो
मस्ती में जो चाहे हो जाये होने दो
ऐसे में तुम हो गये बड़े बेईमान, हो~
सो रब दी!
जय जय शिव शंकर ...

रस्ते में हम दोनों घर कैसे जायेंगे
घर वाले अब हमको खुद लेने आयेंगे
कुछ भी हो लेकिन मज़ा आ गया मेरी जान, हो~
सो रब दी!
जय जय शिव शंकर ...
( गीतकार आनन्द बक्षी )

मैंने पी, तूने पी, सबने ही,जमके पी 
ऐसे ही, पिए जो, जिए वो, जिन्दगी 
मस्ती में, एक दूजे पर, हो गए महरबां। हो  
(स्वरचित अंतरा  प्रेम फर्रुखाबादी )
सो रब दी!
जय जय शिव शंकर ...

बुधवार, 3 अप्रैल 2013

गुजर गया यह जीवन मेरा रोते रोते


गुजर गया यह जीवन मेरा रोते रोते। 
अनचाहे रिश्तों का बोझा ढ़ोते ढ़ोते।। 

पीछे पड़ गयी मेरे दुनिया ये दीवानी 
कब तलक छुडाऊँ पीछा सोते सोते।।

फलते देखे पाप दिन दूने रात चौगुने
फल न पाए पुण्य मर गया बोते बोते।।
 
कई मिले हैं लोग यहाँ पे मन के मैले 
सदियाँ लग जाएँगी इनको धोते धोते।। 

सोमवार, 11 मार्च 2013

दिल लगाके हटाना नहीं चाहिए


दिल लगाके हटाना नहीं चाहिए
दिल किसी का दुखाना नहीं चाहिए।
  प्रेम जो भी करे प्रेम उससे करो 
प्रेम से मुँह फिराना नहीं चाहिए।

चाहने पर भी कोई तुम्हें चाहे न
दिल उससे लगाना नहीं चाहिए।

मान दे गर कोई गाना गा दीजिए 
मान बिन गाना गाना नहीं चाहिए।

प्रेम में प्रेम से प्रेम पा ही जाओगे  
प्रेम में लड खडाना नहीं चाहिए।

                  

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है



कोई दर्द बाँटता तो कोई खुशी बाँटता है। 
जिसके पास जो होता वो वही बाँटता है। 

अँधेरों में जीना भी कोई जीना है दोस्त, 
उसका जीना जीना जो रोशनी बाँटता है। 

किसी की कभी भी जान ले सकता दुष्ट, 
पर सज्जन हमेशा ही जिन्दगी बाँटता है। 

किसी को रुलादे ऐसा गम किस काम का, 
उसको सराहो जो सब को हँसी बाँटता है। 

बुझदिल लोग जिया करते हैं उदासियों में, 
दिलदार वही जो सबको ताजगी बाँटता है।

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

छोड़ें अपने बैर को, माँगें सबकी खैर को


छोड़ें अपने बैर को, माँगें  सबकी खैर को
आओ मिलकर, हमदम, हमदम, हमदम 
सोचें समझें,सोचें समझें,सोचें समझें,हम 
खुशियाँ  लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

बेहतर से बेहतर, हम काम करेंगे
काम से ही अपने, हम नाम करेंगे
देखेंगे,  एक  दूजे  में  ना,  कोई  ख़म। 
खुशियाँ  लुटाके, अपना लेंगे,सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

आपस में हम सब, मिलके रहेंगे 
फ़ूलों की तरह हम, खिलके रहेंगे   
चाहे,  लगाना  पड़े, कितना भी, दम।
खुशियाँ लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम
छोड़ें अपने बैर को...

मंदिर में बैठकर हम, ध्यान करेंगे  
नारी का समाज में, सम्मान करेंगे  
इंसानियत का,मिलके,निभा देंगे, धरम। 
खुशियाँ लुटाके, अपना लेंगे, सबके गम 
छोड़ें अपने बैर को...

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

कथनी और करनी में, जिसके अंतर होय


कथनी और करनी में,  जिसके  अंतर होय।
देखो  उससे सयाना, इन्सां  नहीं  है कोय ।।
इन्सां  नहीं है कोय, देख  मौका  जो बदले।
किसमें इतनी लियाकत, जो उसको पढ़ले।।
कहे"प्रेम"कविराय ये, है उसकी खासियत।
बातें सिर्फ  करे मगर, है नहीं   इंसानियत।।

सोमवार, 21 जनवरी 2013

आनंद बक्षी साहेब मेरी प्रेरणा हैं



फिल्म -अलग अलग 

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा  
बेमुरब्बत बेवफ़ा दुनिया है ये 
है यही दुनिया तो क्या दुनिया है ये 
क्या कमी थी दुश्मनों की 
क्या कमी थी दोस्तों की 
कभी दुश्मनों ने लूटा
कभी दोस्ती ने मारा             

कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा।     (गीतकार  आनंद बक्षी )

दिल तो दिल है, दिल की कहें क्या 
कुछ कहें तो  भला, कुछ कहें क्या 
कहीं नाजनीं के मेले
तो कहीं सादगी के रेले
कभी नाजनीं ने लूटा
कभी सादगी ने मारा।    ( स्व रचित अंतरा  प्रेम फर्रुखाबादी )                         
                                

गिला मौत से नहीं है
मुझे जिन्दगी ने मारा 
कभी बेकसी ने मारा कभी बेखुदी ने मारा 
गिला मौत से नहीं है मुझे जिन्दगी ने मारा

बुधवार, 16 जनवरी 2013

लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं



लड़के लड़कियों के पीछे पड़े हैं।
जिधर देखो उधर बेशर्म खड़े हैं।

बिना देखे इन्हें चैन ही न आये
दिल के हाथों में मजबूर बड़े हैं।

समझाओ तो समझाते ही नहीं
हो जाते एक दम चिकने घड़े हैं।
बेशर्म इतने कि मत पूँछो भाई
कुत्तों जैसी  कुत्तई पर अड़े हैं।

समाज चुपचाप है इन्हें देख के
तभी लड़कियों पे जुल्म बढ़े हैं।
वही लड़के छेड़ते लड़कियों को
जिसके घर में संस्कार सड़े हैं।

हम बेवफा हरगिज न थे





मंगलवार, 8 जनवरी 2013

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

दिल चुराकर नज़र चुराना ......



दिल  चुरा कर  नज़र चुराना,  ठीक नहीं होता। 
अपना बना कर फिर सताना, ठीक नहीं होता। 

निभा  सको जितने  उतने, वादे करना सीखो 
वादा  करके  मुकर  जाना,  ठीक  नहीं  होता।

दूर  रहना ही था तो  क्यों,  नज़दीक  में आये 
नज़दीक आकर  दूर जाना,  ठीक  नहीं होता।  

हँसा-हँसा कर दुनियां को, प्रेम पुण्य  कमाओ 
रुला रुला कर  पाप  कमाना, ठीक नहीं होता।