मंगलवार, 25 सितंबर 2012

स्वरचित अन्तरा,आदमी जो कहता है




आदमी जो कहता है  आदमी जो सुनता है
जिन्दगी भर वो सदायें  पीछा करती हैं.  

 (फिल्म - मजबूर - गीत  आनंद बक्षी )

पहली नज़र का प्यार प्यार होता है 
याद आये तो दिल बेकरार होता है 
भुलाने से नहीं भूलें, उसकी यादें 
झूठ नहीं कहता हूँ,बिल्कुल सच कहता हूँ 
उसकी मस्त अदाएं पीछा करती हैं...
(स्वरचित  अन्तरा - प्रेम फर्रुखाबादी )


आदमी जो कहता है  आदमी जो सुनता है
जिन्दगी भर वो सदायें  पीछा करती हैं.  

 (फिल्म - मजबूर - गीत  आनंद बक्षी )

शनिवार, 22 सितंबर 2012

स्वरचित अन्तरा,तेरे नाम के सिवा कुछ याद नहीं



तेरे नाम के सिवा कुछ  याद नहीं  
मुझे क्या हो गया  कुछ याद नहीं  
( फिल्म -अलग अलग  गीत आनंद बक्षी) 

उठते बैठते चलते फिरते 
तुझको ही बस सोचूँ 
कुछ कुछ होने लगता मन में 
मन को कैसे रोकूँ 
बंद हो या  खुली आँख हो 
देखूं तेरे ही नज़ारे 
तेरे नज़ारे लगते मुझको 
अपनी जां से प्यारे . (स्वरचित अन्तरा  प्रेम फर्रुखाबादी )    

तेरे नाम के सिवा कुछ  याद नहीं  
मुझे क्या हो गया  कुछ याद नहीं  

रविवार, 16 सितंबर 2012

स्वरचित अन्तरा, हम बेवफा हरगिज न थे



हम बेवफा  हरगिज न थे -  फिल्म शालीमार -  रचना आनंद बक्षी . 
आनंद बक्षी साहेब मेरी प्रेरणा  के स्रोत हैं।

हमने जो सपने कभी, देखे थे मिलके 

सपने वो अपने सब चूर हुए 
तुमने भी जिद की, हमने भी जिद की        
जिद में ही हम तुम दूर हुए 
मिलके रहें, सारी  उमर
हम ये दुआ कर न सके।    ( स्वरचित  अन्तरा - प्रेम फर्रुखाबादी )


मेरी इस अंतरा  का आनंद लीजिये।




शनिवार, 8 सितंबर 2012

जहाँ में जो भी आया मुहबत से ही आया




जहाँ में जो भी आया, मुहब्बत से ही आया 
आ कर जो  भी पाया, मुहब्बत से ही पाया ।  
मुहब्बत का दामन, कभी छोड़ना नहीं  प्रेम 
हर बुरे वक्त  में साथ दे,ऐसा  है यह साया।