शुक्रवार, 11 मई 2012

शायरी तो आती नहीं




शायरी तो आती नहीं पर शायर बनना चाहता हूँ 
आशिकी तो आती नहीं आशिक बनना चाहता हूँ .

किस को दिल दूं जाकर किस से दिल लूं जाकर  
दीवानगी तो आती नहीं दीवाना बनना चाहता हूँ.

हाय  ढूँढूं कहाँ मैं उसको दिल मेरा चाहे जिसको 
मस्ती तो आती नहीं मस्ताना बनना चाहता हूँ . 

चाहत में जल जाऊँगा जल करके मिट जाऊँगा    
तड़पन तो आती नहीं परवाना बनना चाहता हूँ.   

2 टिप्‍पणियां:

  1. किस को दिल दूं जाकर किस से दिल लूं जाकर
    दीवानगी तो आती नहीं दीवाना बनना चाहता हूँ....

    बहुत खूब ... दीवानगी अपने आप ही आ जायेगी ... जब प्यार वाली कोई सामने आ जायेगी ...

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  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...आभार
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    आत्मविश्वास की महत्ता ..

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