गुरुवार, 24 मार्च 2011

जब से आप मुझमें समाने लग गये



जब से आप मुझमें समाने लग गये।
तब से
रात-दिन मुसकाने लग गये।

भा गये एक दूजे को हम दिलों जां से
दिलों में हंसीं सपने सजाने लग गये।

यह हम जानते हैं और तुम जानते हो
पास आने में कितने ज़माने लग गये।

एक-दूजे को शुक्रिया कहना ही होगा
सही बिल्कुल अपने निशाने लग गये।

अपने चर्चे तो
आम हो गये हैं जहाँ में
एक दूजे को सब लोग बताने लग गये।

1 टिप्पणी:

  1. यह हम जानते हैं और तुम जानते हो
    पास आने में कितने ज़माने लग गये।

    वाह, बेहतरीन शेर है।
    पूरी ग़ज़ल अच्छी लगी।

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