सोमवार, 21 मार्च 2011

जब भी बोलो किसी से बोलो बोलो प्यार की बोली



जब भी बोलो किसी से बोलो बोलो प्यार की बोली।
प्यार की बोली है प्यारी बोली समझो ये हमजोली॥
मिल जुल कर के जीना
ही सचमुच जीवन होता है।
जब तक रंग से रंग मिले न बताओ कैसी वो होली॥
नफरत से नफरत फैलती और मुहब्बत से मुहब्बत।
टेड़ों को ये टेड़ी है दुनियां और भोलों को है ये भोली॥
सामजस्य जहाँ
होता है प्यारे होता है स्वर्ग वहीं पर
ख़ुशी से जी के
खुशियों से सब भरते सब की झोली॥


जिनकी बातों में रस होता है उसके दीवाने सब होते।
ऐसा वो ही कर पाते जिसने
बोली तोली फिर बोली॥

2 टिप्‍पणियां:

  1. जब भी बोलो किसी से बोलो बोलो प्यार की बोली।
    प्यार की बोली है प्यारी बोली समझो ये हमजोली॥

    सच है , मीठा बोलने में क्या खर्च होता है । होली पर्व की शुभकामनायें ।

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  2. सामजस्य जहाँ होता है प्यारे होता है स्वर्ग वहीं पर
    ख़ुशी से जी के खुशियों से सब भरते सब की झोली॥

    जिनकी बातों में रस होता है उसके दीवाने सब होते।
    ऐसा वो ही कर पाते जिसने बोली तोली फिर बोली॥

    तौल कर ही बोलना चाहिए।
    प्रेरक रचना।

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