मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा



सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा।
उसकी चाह में आँसू अपने बहाता रहा।

पर वो नहीं मिला उसे नहीं मिलना था
बस उसको याद कर के पगलाता रहा।

मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।

प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।

लोगों ने कहा ऐसी दीवानगी को छोड़ो
उनकी नहीं मानी अपनी चलाता रहा।

अपनी बातों से मैंने सबको बना दिया
पता चला कि खुद को ही बनाता रहा

9 टिप्‍पणियां:

  1. मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
    दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।

    वाह भाई जी , बहुत बढ़िया रचना है ।

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  2. प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
    इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।

    प्यार का रिश्ता अजीब ही होता है।
    अच्छी रचना।
    शुभकामनाएं।

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  3. मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
    दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।..

    Ye to diwaangi ki had hai ... badhiya rachna hai ...

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  4. बाऊ जी,
    नमस्ते!
    क्या समझेंगे लोग सयाने...
    इश्क की बातें इश्क ही जाने!
    खूबसूरत!
    आशीष
    ---
    लम्हा!!!

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  5. बहुत सुन्दर अच्छी लगी आपकी हर पोस्ट बहुत ही स्टिक है आपकी हर पोस्ट कभी अप्प मेरे ब्लॉग पैर भी पधारिये मुझे भी आप के अनुभव के बारे में जनने का मोका देवे
    दिनेश पारीक
    http://vangaydinesh.blogspot.com/ ये मेरे ब्लॉग का लिंक है यहाँ से अप्प मेरे ब्लॉग पे जा सकते है

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  6. प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
    इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।

    लोगों ने कहा ऐसी दीवानगी को छोड़ो
    उनकी नहीं मानी अपनी चलाता रहा।
    its my first visit but really a long time i got a readable gazal...congrts!

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