मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा



सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा।
उसकी चाह में आँसू अपने बहाता रहा।

पर वो नहीं मिला उसे नहीं मिलना था
बस उसको याद कर के पगलाता रहा।

मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।

प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।

लोगों ने कहा ऐसी दीवानगी को छोड़ो
उनकी नहीं मानी अपनी चलाता रहा।

अपनी बातों से मैंने सबको बना दिया
पता चला कि खुद को ही बनाता रहा

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

कहीं मेरी जिन्दगी न यूँ ही गुजर जाये।



कहीं मेरी जिन्दगी न यूँ ही गुजर जाये।
सोच सोच कर मुझको यही डर सताये।

दूर तक मुझे कोई अपना नहीं दिखता
कोई दिखे तो यह जिन्दगी सँवर जाये।

बड़े-बड़े अरमान हैं इस दीवाने दिल के
हाय कहीं ये मेरी धड़कन न ठहर जाये।

मन नहीं करता है
तन्हा अब जीने को
आखिर यह मन जाये तो किधर जाये।

डूबे हुए हैं सब अपनी अपनी मस्ती में
किसको फ़िक्र कोई जिए या मर जाये