मंगलवार, 4 जनवरी 2011

जो नहीं हो वो ही सबको बताते क्यों हो


जो नहीं हो वो ही सबको बताते क्यों हो
खुद की नज़र में खुदको गिराते क्यों हो

जो मिलना होगा मिल जायेगा वक्त पर
वक्त से पहले आखिर छटपटाते क्यों हो

असफल तुम्हीं नहीं बहुत हुए हैं जहाँ में
असफलता पर दुःख को मनाते क्यों हो

हार जीत सुख दुःख ये राही हैं जीवन के
इनसे हौसला लो खुदको रुलाते
क्यों हो

तुम्हारे सिवा तुम्हारे साथ कोई भी नहीं
लड़िये जंग खुदको बेदम बनाते क्यों हो




2 टिप्‍पणियां:

  1. हार जीत सुख दुःख ये राही हैं जीवन के
    इनसे हौसला लो खुदको रुलाते क्यों हो।

    हौसला देती रचना
    सुन्दर

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  2. हार जीत सुख दुःख ये राही हैं जीवन के
    इनसे हौसला लो खुदको रुलाते क्यों हो ...

    बहुत खूब ... प्रेम जी लाजवाब शेर ....
    नया साल मुबारक हो ...

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