गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

जिताने का भरोसा दिलाके वकील आपका केस लडेगा



जिताने का भरोसा दिलाके वकील आपका केस लडेगा
जो भी खर्चा होगा वो सब आप को ही प्यारे देना पड़ेगा
सुलह कराना तो वकील की फितरत में होता ही नहीं

आपका केस आगे बढ़ाता जायेगा जितना आगे बढ़ेगा।

अपनी अक्ल से वो बेवकूफों से खूब धन को कमाता है
गँवाने वाला अपनी गाढ़ी कमाई को खूब सालों गँवाता है
खून अपने ही मुँह से उसके निकलने लगता एक दिन

पर वो समझता है कि यह खून दुश्मन के तन से आता है।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो



जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो
तड़प तड़प कर आखिर मुझे क्यों तड़पाते हो

ऐसे भी कोई किसी को प्यार करता है
कभी इकरार तो कभी इंकार करता है
खाम खां किसी को बताओ क्यों उकसाते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो

कभी पास आकर तो देखो हमदम मेरे
आखिर क्यों बेरुखी दिखाते हमदम मेरे
इस सोये हुए दिल को भला क्यों धडकाते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो

कहते बनता नहीं जो हुआ हाल हमारा
बिना तेरे होता ही नहीं अब तो गुजारा
प्यार कर के मुझसे आखिर क्यों कतराते हो
जो पूरे न हों वो ख्वाब मुझे क्यों दिखलाते हो




शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

देखता क्या तू मुझको छूकर तो देख



देखता क्या तू मुझको छूकर तो देख
कहीं यूं न मिलेगा
मज़ा
तुझको शेख

हुस्न का मज़ा मुफ्त में लेने चला
पहले मेरा फिर कर अपना भला
पास गर आना है तो कर ढीली जेब

एक से बढ़ कर एक यहाँ आये हैं
तुमसे बढ़कर रंग यहाँ जमाये हैं
मिट जायेगा न निकाल अपनी तेग

लगता इश्क का
तुझे
ज्ञान नहीं
तू कहाँ खड़ा है तुझे ध्यान नहीं
छोड़ इश्क को ले बैठ के खा ले सेब

शनिवार, 30 जुलाई 2011

बढ़ गये हैं आपस में, इतने बैर



बढ़ गये हैं आपस में, इतने बैर,

जी रहे सब एक -दूजे के, बगैर ।

जिसे भी देखिये, बदहवास लगे , 
किसे अपना कहे, तो किसे गैर 

हर कोई
अपनी ही, धुन में यहाँ,
कोई डूबा रहा तो, कोई रहा तैर 

कौन करे परवाह, यहाँ किस की, 
कौन पूछे किस को, दो पल ठैर 

देख रहा है हर कोई, घर में टीवी,
सिकोड़ कर बैठ गया, अपने पैर 

तन-मन से दुखी हैं, सब के सब,
निकल नहीं रहा, करने कोई सैर 

उलझा हुआ हर कोई, चिंताओं में
किसे फुरसत पूंछे, किसी की खैर 




सोमवार, 4 जुलाई 2011

तेरी मुहब्बत ने मुझको जिन्दगी दी है



तेरी मुहब्बत ने मुझको जिन्दगी दी है।
यह जिन्दगी मेरी बड़ी खूबसूरत की है।

होश संभाले हुए बढ़ रहा था धीरे धीरे

जिन्दगी क्या है तड रहा था धीरे धीरे
बड़ा ही मस्त मुझको तू ने बेखुदी दी है।

मुझे मालूम न था ये जिन्दगी क्या है
तुझसे मिलके मुझे आज पता चला है
जो अब तक न मिली तू ने वो ख़ुशी दी है।

मेरे हर सवाल का जवाब तुझसे मिला
अब क्या कहूँ तुझे पाके दिल ये खिला
धूप जैसी जिन्दगी में तू ने चाँदनी दी
है।

शनिवार, 2 जुलाई 2011

ऐ मेरे नादान दिल तू क्यों नहीं समझता है


मेरे नादान दिल तू क्यों नहीं समझता है।
जैसे चलती दुनिया वैसे क्यों नहीं चलता है।

पूरी दाल गल गयी अच्छी तरह से फिर भी
बीच दाल में रहके भी तू क्यों नहीं गलता है।

हर कोई
तुझे छल कर तुझसे आगे बढ़ गया
छले जाने पर भी बता तू क्यों नहीं छलता है।

मेरी बात को कभी समझने की कोशिश कर
सब फल गये जाने तू क्यों नहीं फलता है।

गुरुवार, 9 जून 2011

ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी


ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
चलके दिखाये चलना सिखाये
जीवन में आगे बढ़ना सिखाये
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी

अपने लिए कभी, जीती नहीं है
ऐसी कोई इसकी, नीती नहीं है
पर सेवा में सारा, जीवन बिताये। 

ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी

गाँव हो या फिर, शहर हो भले
चाहे कोई भी फिर, पहर हो भले
हर साथी को ये, मंजिल पहुँचाये।
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी


अपनी धुन में सदा, मस्त रहती
मस्ती में ही
रहो, हर वक्त कहती
मस्ती में ये मस्त, सीटी बजाये
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी


भेद किसी से कभी, करती नहीं
प्रीती करती नफरत, करती नहीं
जो भी बैठे उसको, दिल में बिठाये

ये रेलगाड़ी, ये रेलगाड़ी
ये रेलगाड़ी, ये
रेलगाड़ी




सोमवार, 6 जून 2011

वो बहुत दूर हैं मगर फिर भी दिल के पास हैं



वो बहुत दूर हैं मगर फिर भी दिल के पास हैं
हम उनके साथ साथ वो हमारे साथ साथ हैं
उनकी खासियत एक नहीं कई एक गिनादूं
वो मेरे लिए खास हैं हम उनके लिए खास हैं


मेरे ख्यालों पर बस उन्हीं का चलता राज है
उनके राज से ये जिन्दगी का बजता साज है

उनसे ही हमारा
कल था उनसे ही कल होगा
उनकी बदौलत
ही तो फूलता फलता आज है

मैं उसकी सजनी और वो हमारा साजन होगा
उसकी खुश्बू से महकता हमारा आंगन होगा
एक दूजे के प्यार में दिल से हम डूबते जायेंगे
मस्ती में मुस्कराता हुआ हमारा जीवन होगा

रविवार, 5 जून 2011

छोड़कर मुझको इस तरह क्यों चल दिए यार



छोड़कर मुझको इस तरह क्यों चल दिये यार।
कुछ कहा सुना भी नहीं क्यों निकल लिये यार॥

साथ जियेंगे साथ मरेंगे ये अरमान था हमारा
आखिर बात क्या हुई राह क्यों बदल लिये यार॥

कैसे सहूँगा गम तेरी जुदाई का जहाँ में अकेले
मेरी ख्वाहिश को कहो
यूं क्यों मसल दिये यार॥

एक बार तो कहते कि अब तुम से जी भर गया
कहा कुछ किया कुछ ऐसा
क्यों छल किये यार॥

गुरुवार, 2 जून 2011

अंजानो से कभी दिल न लगाना



अंजानो से कभी दिल न लगाना
हो सके तो प्यारे खुदको बचाना

पहले पहले तो ये पास में आयें
पास आके अपना खास बनायें
खास बना के फिर डालें ये दाना
हो सके तो प्यारे खुदको बचाना

झूठी कसमें ये खायें खिलाएँ
जाने क्या क्या ख्वाब दिखाएँ
इनकी बातों में कभी नहीं आना
हो सके तो प्यारे खुदको बचाना

मतलब में बड़े ये शातिर होते
बातों में भी ये बड़े माहिर होते
होता काम इनका अपना बनाना
हो सके तो प्यारे खुदको बचाना

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

अन्ना हजारे झुकना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा





अन्ना हजारे झुकना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।
अपना टेकना घुटना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।

नेताओं की चालों में आ के इनसे लिपट न जाना
मांगे मनवाये बिना तुम खुद में सिमट नहीं जाना
मीठी बातों में घुलना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।

इन भ्रष्ट नेताओं ने सारा देश ही बेच कर खा लिया
कहते बनता नहीं कुछ
भी ऐसे मोड़ पर ला दिया
दूर रहना इनसे जुड़ना नहीं,देश तुम्हारे साथ खड़ा।

आपको बरगलाने की बहुत ही कोशिश की जाएगी
तुम्ही कहो बिना तुम्हारे ये जनता कैसे जी पायेगी
बिल्कुल हिलना डुलना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।

करोड़ों लोगों में ईश्वर ने तुम को इस के लिए चुना
तुम्हारी आवाज पर ये जन सैलाब उमड़ा कई गुना
इनके तराजू में तुलना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।

तुम्हारे इरादों के आगे सरकार जरूर झुक जाएगी
जैसे चाहते हो तुम वैसे बात आपकी मान जाएगी
आगे बढ़ना अब रुकना नहीं, देश तुम्हारे साथ खड़ा।

गुरुवार, 24 मार्च 2011

जब से आप मुझमें समाने लग गये



जब से आप मुझमें समाने लग गये।
तब से
रात-दिन मुसकाने लग गये।

भा गये एक दूजे को हम दिलों जां से
दिलों में हंसीं सपने सजाने लग गये।

यह हम जानते हैं और तुम जानते हो
पास आने में कितने ज़माने लग गये।

एक-दूजे को शुक्रिया कहना ही होगा
सही बिल्कुल अपने निशाने लग गये।

अपने चर्चे तो
आम हो गये हैं जहाँ में
एक दूजे को सब लोग बताने लग गये।

सोमवार, 21 मार्च 2011

जब भी बोलो किसी से बोलो बोलो प्यार की बोली



जब भी बोलो किसी से बोलो बोलो प्यार की बोली।
प्यार की बोली है प्यारी बोली समझो ये हमजोली॥
मिल जुल कर के जीना
ही सचमुच जीवन होता है।
जब तक रंग से रंग मिले न बताओ कैसी वो होली॥
नफरत से नफरत फैलती और मुहब्बत से मुहब्बत।
टेड़ों को ये टेड़ी है दुनियां और भोलों को है ये भोली॥
सामजस्य जहाँ
होता है प्यारे होता है स्वर्ग वहीं पर
ख़ुशी से जी के
खुशियों से सब भरते सब की झोली॥


जिनकी बातों में रस होता है उसके दीवाने सब होते।
ऐसा वो ही कर पाते जिसने
बोली तोली फिर बोली॥

रविवार, 13 मार्च 2011

उसने तो मेरी सोच एक दम बदल कर रख दी



उसने तो मेरी सोच एक दम बदल कर रख दी
नई के वास्ते पुरानी उसने कतल कर रख दी
वो
मुझसे मिले हैं ऐसे सदियों से मिले हों जैसे
मेरी
जिन्दगी पर जिन्दगी संभल कर रख दी।

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा



सारी उम्र किसी के सपने सजाता रहा।
उसकी चाह में आँसू अपने बहाता रहा।

पर वो नहीं मिला उसे नहीं मिलना था
बस उसको याद कर के पगलाता रहा।

मित्रों ने पूँछा कि इतने दीवाने क्यों हो
दिल चीर उसकी तसवीर दिखाता रहा।

प्यार का रिश्ता ही कुछ अजीब रिश्ता
इक तरफ़ा था प्यार मेरा निभाता रहा।

लोगों ने कहा ऐसी दीवानगी को छोड़ो
उनकी नहीं मानी अपनी चलाता रहा।

अपनी बातों से मैंने सबको बना दिया
पता चला कि खुद को ही बनाता रहा

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

कहीं मेरी जिन्दगी न यूँ ही गुजर जाये।



कहीं मेरी जिन्दगी न यूँ ही गुजर जाये।
सोच सोच कर मुझको यही डर सताये।

दूर तक मुझे कोई अपना नहीं दिखता
कोई दिखे तो यह जिन्दगी सँवर जाये।

बड़े-बड़े अरमान हैं इस दीवाने दिल के
हाय कहीं ये मेरी धड़कन न ठहर जाये।

मन नहीं करता है
तन्हा अब जीने को
आखिर यह मन जाये तो किधर जाये।

डूबे हुए हैं सब अपनी अपनी मस्ती में
किसको फ़िक्र कोई जिए या मर जाये

रविवार, 16 जनवरी 2011

मँहगाई


मँहगाई
!


अब तो मार ही डालेगी मँहगाई
जीते जी ही खालेगी मँहगाई

बेबस हुआ है शासन सारा
लुटेरों ने लूट है मचाई।
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई

भला कोई खरीदे क्या खाये

कुछ भी समझ में आये

हर मुख से निकल रही आई
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई

कहीं मिलती नहीं असली चीजें

हर तरफ मिलती नकली चीजें

हर नीयत में खोट है समाई
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई

दया करुणा कर गयी किनारा

छोड़ कर इंसानियत बेसहारा

मच रही हर तरफ हाय- हाय
अब तो मार ही डालेगी मँहगाई


शुक्रवार, 7 जनवरी 2011

जय माँ भवानी

Recorded

जय माँ भवानी

तेरे द्वार की माँ सीढ़ियाँ जो चढ़ गया है
जीवन में आगे ही आगे वो बढ़ गया है
मैं भी तेरी सीढियां यही सोचके चढ़ा हूँ
सुनले मेरी फ़रियाद तेरे सामने खड़ा हूँ

जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय
माँ भवानी, जय माँ भवानी
करुँ तेरा गुणगान, करो मेरा कल्याण
करुँ तेरा गुणगान, करो मेरा कल्याण
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी

हर लो माँ सब दुःख मेरे
के पड़ा हूँ द्वार तेरे
तेरा ही अब मुझको सहारा
हरो मेरा व्यवधान,हरो मेरा व्यवधान
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी

जीवन से मैं ऊब गया हूँ
भव सागर में डूब गया हूँ
नीचे ही गिरता जाता हूँ
करो मेरा उत्थान, करो मेरा उत्थान
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी

कुछ भी मुझको भाये ना
कुछ भी समझ में आये ना
अज्ञानी हूँ मैं इस जग में
हरो मेरा अज्ञान ,हरो मेरा अज्ञान
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी

हर किसी ने मुझको लूटा है
लगता हर रिश्ता झूठा है
झूठ नहीं मैं सच कहता हूँ
रिश्ता तेरा महान,रिश्ता तेरा महान
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी,
जय माँ भवानी, जय माँ भवानी

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

जो नहीं हो वो ही सबको बताते क्यों हो


जो नहीं हो वो ही सबको बताते क्यों हो
खुद की नज़र में खुदको गिराते क्यों हो

जो मिलना होगा मिल जायेगा वक्त पर
वक्त से पहले आखिर छटपटाते क्यों हो

असफल तुम्हीं नहीं बहुत हुए हैं जहाँ में
असफलता पर दुःख को मनाते क्यों हो

हार जीत सुख दुःख ये राही हैं जीवन के
इनसे हौसला लो खुदको रुलाते
क्यों हो

तुम्हारे सिवा तुम्हारे साथ कोई भी नहीं
लड़िये जंग खुदको बेदम बनाते क्यों हो