रविवार, 10 अक्तूबर 2010

भरोसा कर देख लिया हरकोई झूठा है

भरोसा कर देख लिया हरकोई झूठा है।
भरोसे में ले के मुझको हरकोई लूटा है।

लोग कहते हैं कुछ तो वो करते हैं कुछ
जाने क्यों हर किसी से हरकोई रूठा है।

देने की जगह सब लेने पर ही तुले हुए
इसी कारण रिश्ता आज हरकोई टूटा है।

अच्छाई की जगह पर बुराई कायम हुई
तभी तो अपनों से आज हरकोई छूटा है।

6 टिप्‍पणियां:

  1. देने की जगह सब लेने पर ही तुले हुए
    इसी कारण रिश्ता आज हरकोई टूटा है।
    यथार्थ दर्शाती रचना

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  2. सच फ़रमाया आपने प्रेम जी !

    आज सम्बन्ध नाम मात्र के रह गये हैं क्योंकि स्वार्थ सब पर हावी है ...हालांकि स्वार्थ बुरा नहीं है लेकिन केवल और केवल स्वार्थी होना अच्छी बात नहीं है

    उम्दा रचना कही आपने...उत्तम पोस्ट !

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  3. देने की जगह सब लेने पर ही तुले हुए
    इसी कारण रिश्ता आज हरकोई टूटा है। ...

    रिश्तों की सच्चाई लिखी है आपने ...

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  4. लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

    जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

    मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

    भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

    अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

    http://umraquaidi.blogspot.com/

    उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
    “उम्र कैदी”

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  5. bahut acha likha hai apne.... mein to apka PANKHA bann gya hun Prem ji!

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