शनिवार, 4 सितंबर 2010

तुम्हें हमारा प्यार अगर दिल से मंजूर होता



तुम्हें हमारा प्यार अगर दिल से मंजूर होता।
तो बड़ा ही निराला अपना जीवन हुजूर होता।

दूरियों में न हम तुम
इस तरह सुलग रहे होते 
मिल जाते तो अपने दिलों का गम दूर होता।

ये फूल भी शरमा जाते अपनी ख़ुशी देख कर
इस तरह अपने चेहरों पे चमकता नूर होता।

वक्त ने हमें डुबाया न होता खुद के गरूर में
 

तो आज अफ़सोस न होता न दिल चूर होता।

5 टिप्‍पणियां:

  1. दूरियों में ऐसे न हम सुलगते न तुम सुलगते
    मिल जाते तो अपने दिलों का गम दूर होता।


    -बहुत बढ़िया.

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  2. ये फूल भी शरमा जाते अपनी ख़ुशी देख कर....
    Beautiफूल ....Anड
    Cooल !!!!

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