सोमवार, 13 सितंबर 2010

बहुत कुछ दिया है, तुमने प्रभु



बहुत कुछ दिया है, तुमने प्रभु
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।
जो कुछ भी
प्रभु, पास में मेरे
मेरा नहीं वो, सब है तुम्हारा।
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।

भव-सागर में, था मैं उलझा
तेरी शरण में, आकर सुलझा
तेरी कृपा से, पाया किनारा।
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।

तुझसे ही प्रभु,
हैं शाम-सवेरे
जानूँ नहीं कितने, रूप हैं तेरे
देखूँ जिधर उधर, तेरा नज़ारा।
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।
अपना तुझको, जिसने बनाया
उसका जीवन, तुमने खिलाया
हो गये
उसके , जिसने पुकारा।
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।

भक्ति में
अपनी,
रमाये रखना
कृपा की द्रष्टि, बनाये रखना
तेरा ही बस, मुझको सहारा।
कैसे करुँ मैं, शुक्रिया तुम्हारा।

गुरुवार, 9 सितंबर 2010

मस्त हवाओ मुझको बताओ



मस्त हवाओ, मुझको बताओ,महबूब मेरा, किस हाल में है

छूकर उसके , बदन को आओ,
महबूब मेरा, किस हाल में है। 

महबूब मेरा, किस हाल में है।

ऐ चाँद सुन, तुझे मेरी कसम,देखता होगा, तू मेरा हमदम
खुद में ही उसे, मुझको दिखाओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ

महबूब मेरा, किस हाल में है।

शायरों से मेरी, गुजारिश यही,कैसे सोचता वो, जहाँ भी कहीं
उससे वाकिफ, मुझको कराओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ

महबूब मेरा, किस हाल में है।

तेरी खुदाई खुदा, तू ही जाने,आखिर करें क्या, हम दीवाने
जल्दी से अब, मुझको मिलाओ,
मस्त हवाओ, मुझको बताओ
महबूब मेरा, किस हाल में है।

शनिवार, 4 सितंबर 2010

तुम्हें हमारा प्यार अगर दिल से मंजूर होता



तुम्हें हमारा प्यार अगर दिल से मंजूर होता।
तो बड़ा ही निराला अपना जीवन हुजूर होता।

दूरियों में न हम तुम
इस तरह सुलग रहे होते 
मिल जाते तो अपने दिलों का गम दूर होता।

ये फूल भी शरमा जाते अपनी ख़ुशी देख कर
इस तरह अपने चेहरों पे चमकता नूर होता।

वक्त ने हमें डुबाया न होता खुद के गरूर में
 

तो आज अफ़सोस न होता न दिल चूर होता।