शुक्रवार, 28 मई 2010

ख़ुशी से जीने का कभी मन किया करो


ख़ुशी
से जीने का कभी मन किया करो
ख़ुशी मन में हो तो भजन किया करो

नज़र कमजोर हो गयी हो तो क्या हुआ
सोने से पूर्व आँखों में अंजन किया करो

सही गलत का फैसला गर हो सके तो
शांति से बैठके मन में मंथन किया करो

कभी इससे कभी उससे काम चलेगा
एक का होके
समर्पण जीवन किया करो

मनोदशा तब ही शुध्द सरल रह सकती है
अच्छे
साहित्य का रोज सेवन किया करो

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह प्रेम जी , बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है ।
    सभी काम की बातें ।

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  2. सही गलत का फैसला गर न हो सके तो
    शांति से बैठके मन में मंथन किया करो ..

    सही कहा है .. उम्दा ग़ज़ल है प्रेम जी ...

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  3. मनोदशा तब ही शुध्द सरल रह सकती है
    अच्छे साहित्य का रोज सेवन किया करो।
    Bahut hee khoob likha hai.
    Aap ne to mere maan kee baat keh dali.
    If you look at my Blog's Aim( Shabdon ka Ujala).

    उत्तर देंहटाएं
  4. मनोदशा तब ही शुध्द सरल रह सकती है
    अच्छे साहित्य का रोज सेवन किया करो।
    Bahut hee khoob likha hai.
    Aap ne to mere maan kee baat keh dali.
    If you look at my Blog's Aim( Shabdon ka Ujala).

    Hardeep

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  5. सही गलत का फैसला गर न हो सके तो
    शांति से बैठके मन में मंथन किया करो।

    सटीक अभिव्यक्ति.....

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया ...आगे भी इंतज़ार रहेगा

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  6. क्या बात है... सुन्दर ग़ज़ल

    बहुत खूब.

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