रविवार, 2 मई 2010

कह दो ये मेरे दिलवर, हम हो गये तुम्हारे


कह
दो ये मेरे दिलवर, हम हो गये तुम्हारे
अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे
अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे

मस्त हवा चलने लगी,तन मन को हरने लगी
बाँहों में मेरी जाओ ,मेरा दिल तुम्हें पुकारे
अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे

एक दूजे के हो जाएँ हम, एक दूजे में खो जाएँ हम
फिर मिलें या मिलें, ये खुश्बू और ये नज़ारे
अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे

प्यार बिना कोई जीना यहाँ, मैं ही नहीं कहता जहाँ
खुशियाँ मिली उसी को, जो भी प्यार में लुटा रे

अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह गुरु ... क्या बढ़िया गीत है ... मज़ा आ गया !

    प्यार बिना कोई जीना यहाँ, मैं ही नहीं कहता जहाँ
    खुशियाँ मिली उसी को, जो भी प्यार में लुटा रे ।

    गजब की पंक्तियाँ ... !

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  2. ब्लाग पर आना सार्थक हुआ
    काबिलेतारीफ़ प्रस्तुति
    आपको बधाई
    सृजन चलता रहे
    साधुवाद...पुनः साधुवाद
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  3. एक दूजे के हो जाएँ हम, एक दूजे में खो जाएँ हम
    फिर मिलें या ना मिलें, ये खुश्बू और ये नज़ारे।
    कह दो हम, हुए तुम्हारे
    अकेले नहीं संवरती, जिन्दगी कोई संवारे।

    बहुत खूब .......आनंद मिला पढकर !!

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  4. 'एक दूजे के हो जाएँ हम, एक दूजे में खो जाएँ हम'


    - प्रेम की यही पराकाष्ठा है.

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