सोमवार, 29 मार्च 2010

वक्त को पकड़ो मत वक्त को छोड़के जिओ



वक्त को पकड़ो मत वक्त को छोड़के जिओ।
वक्त के साथ बदलके खुदको मोड़के जिओ।

वक्त बदलते ही सब लोग बदल जाया करते
जो लुभाये उसी के संग दिल जोड़के जिओ।

मन को विषैला करती नजदीकियां अक्सर
जरूरत नहीं है तो मन को सिकोड़के जिओ।

किसी भी तरह न निभें रिश्ते अपने लोगों से
छोड़ दो उनको रिश्तों को मत तोड़के जिओ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. मन को विषैला करती नजदीकियां अक्सर
    जरूरत नहीं है तो मन को सिकोड़के जिओ ..

    Sach kaha hai ... man ko mukt rakhna chaahiye ...

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  2. बहुत ज्ञानवर्धक बात कही है प्रेम भाई।
    सुन्दर रचना ।

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  3. Bahut sundar ghazal hai
    वक्त को पकड़ो मत वक्त को छोड़के जिओ।
    वक्त के साथ बदलके खुदको मोड़के जिओ।

    Matla bahut akarshak hai.

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