रविवार, 28 फ़रवरी 2010

देखके तुम को माना है मैंने, तुम हो बहुत हँसीन


देख
के तुम को माना है मैंने, तुम हो बहुत हँसीन।
घूमके देखी सारी दुनिया, कोई भी तुम सा नहीं।
झूठ नहीं हम कहते दिलवर कहते हैं हम दिल सेदिल की बातें होती हैं सच्ची कर लो मुझपे यकीं।
कितना मैं चाहूँ तुम को दिल से कैसे यह बतलाऊँजाने यह सारा आसमां और जाने यह सारी जमीं।
तुमने गर ठुकराया तो हो जायेगा जीना मुहाल सच कहूँ तेरे सिवा कहीं कोई मेरा ठिकाना नहीं

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