बुधवार, 20 जनवरी 2010

हम तुम कितने पागल थे अब तक मुझको याद है


वो प्यार तेरा मस्ती भरा अब तक मुझको याद है
हम तुम कितने पागल थे अब तक मुझको याद है

एक दूजे के हुए थे हम तुम पहली ही मुलाकात में
चाहत का वो हसीं लम्हा अब तक मुझको याद है

आँखों में मस्ती छायी थी और दिल भी धड़के थे
हाये वो दिल की धड़कन अब तक मुझको याद है

एक दूजे को देखे बिना हमको चैंन नहीं आता था
बेताबी का दौर सनम वो अब तक मुझको याद है

9 टिप्‍पणियां:

  1. बेताबी का दौर सनम वो अब तक मुझको याद है ।
    बहुत खूब प्रेम जी बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  2. प्रेम जी
    बहुत खूब
    आँखों में मस्ती छायी थी और दिल भी धड़के थे
    हाये वो दिल की धड़कन अब तक मुझको याद है
    क्या बात है
    बहुत बहुत बधाई

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  3. एक दूजे के हुए थे हम तुम पहली ही मुलाकात में
    चाहत का वो हसीं लम्हा अब तक मुझको याद है ....

    बहुत खूब ......... लाजवाब शेर है ..... PAHLI MULAAKAAT TO BARSON YAAD RAHTI HAI .....

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  4. hm-tum kitne paagal tthe,
    ab tk mujhko yaad hai...

    ji haaN...
    yaad to sirf is 'hum' ko hi rehta hai...
    aur 'wo' har baat bhulaa kar bhi
    bechain nahi....
    achhee rachnaa hai .

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