शनिवार, 26 दिसंबर 2009

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही

रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।


अकेले में जीना भी जीना है क्या-2
जीना नहीं है यह जीना है सजा-2
तन - मन से मैं
तरसती रही, बहकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।


हालत हुई कुछ मेरी इस तरह -२
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें उस तरह -२
जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

आँखों ही आँखों में रात कटी -२
पल भर भी मैं सो ना सकी -२
अपनी ही आग में सुलगती रही,भभकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

अब आये अब आये करती रही -२
बस दरवाजे को ही मैं तकती रही- २
अरमान दिल के कुचलती रही,सुबकती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

संग किसी के भी ऐसा ना हो-२
तंग कोई भी मेरे जैसा ना हो -२
मन ही मन में सिकुड़ती रही, उखड़ती रही।
पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही।

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब प्रेम जी
    मज़ा आगया उम्दा रचना
    बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  2. रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
    पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।

    शर्मा जी!
    आपने एक विरहणी की व्यथा का सुन्दर चित्रण किया है!

    उत्तर देंहटाएं
  3. रचना बहुत अच्छी बन पड़ी है , प्रेम भाई।
    आजकल कहीं नज़र नहीं आते , क्या बात है?

    उत्तर देंहटाएं
  4. जल बिन मछली फड़कती रही,बिलखती रही।
    पिया के मिलन को तड़पती रही,तड़पती रही

    लाजवाब लिखा है ......खूबसूरत गीत है ........ मज़ा आ गया प्रेम जी ...........

    उत्तर देंहटाएं
  5. रात भर करवट बदलती रही,मचलती रही।
    पिया के मिलन को तड़पती रही,तडपती रही।

    jaise dil ki baat ko juban mil gai aur badi hi shiddat se shabdon ko rah mili beh nikalne ki..

    badhai ho aapko :)

    उत्तर देंहटाएं
  6. खुबसूरत रचना आभार
    नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं ................

    उत्तर देंहटाएं
  7. Sundar abhivyakti....

    नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !!! नव वर्ष-2010 की ढेरों मुबारकवाद !!!

    उत्तर देंहटाएं