बुधवार, 5 अगस्त 2009

मेरे भइया प्यारे भइया बहिन को क्यों भुला दिया


मेरे भइया प्यारे भइया बहिन को क्यों भुला दिया।
खता हुई है क्या मुझसे जो खुदको यों जुदा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

मात-पिता की हम हैं दो ही संताने
मैं जानू यह भइया और तू भी जाने
मैंने तो माना मगर यह तू नहीं माने
एक खून थे हम और तुम गैर मुझे क्यों बना दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

शायद भाभी ने कुछ कह दिया होगा
मेरे खिलाफ तुमको भर दिया होगा
अपने पक्ष में तुमको कर लिया होगा
जीते जी ही तुमने अपनी बहिन को क्यों रुला दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

जब से हुई हूँ मैं घर से पराई भइया
याद न मेरी तुम्हें कभी आयी भइया
जाने कौन सी घड़ी की मैं जाई भइया
ख़ुद न सोचा तुमने कुछ भी भाभी का क्यों कहा किया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

भाई और बहिन की दीवार है भाभी
होती ऐसी सचमुच बेकार है भाभी
भइया की सुख दुःख संसार है भाभी
भइया मेरा बुरा नहीं पर भाभी ने ही मुझे छुडा दिया।
मेरे भइया प्यारे भइया....

16 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल नये ढंग से लिखा है. वाह-वाह. बहुत बढिया

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  2. UMDA............
    UTTAM..........
    ACHHI KAVITA,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    BADHAAI !

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  3. बहुत सुन्दर भावनापूर्ण रचना
    प्रेम जी
    भाई बहन के प्यार को सघनता से दर्शाया है
    अच्छी रचना

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. सामायिक अद्भुत सुन्दर रचना राखी की शुभकामनायें आभार्

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  6. रक्षाबंधन पर हार्दिक शुभकामनाएँ!
    विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!

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  7. रक्षाबन्धन पर बढ़िया प्रस्तुति है।
    बधाई।

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  8. wah premji, spasht shabdon men , rishton ki spashtata dikhati bhavpurn rachna. badhai

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  9. ईश्वर भाभी को सदबुद्धि दे.

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  10. आप सभी ब्लोगर मित्रों का मेरा हौसला बढाने के लिए दिल से धन्यबाद!!

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