गुरुवार, 20 अगस्त 2009

हम हैं आलसी राम


हम हैं आलसी राम
कोई कहे कुछ करने को तो करते नहीं हम काम
बिन करे ही मन का हो जाए सोचूँ यही दिल थाम
हँसीनों से घिरा रहूँ और चलते रहें जाम पर जाम
देखके हमें हर कोई पहिचाने हो ऐसा हमारा नाम
रहने को घर ऐसा मिले जिसे कहते हों सब धाम
खुशियाँ चूमें कदम हमारे चाहे सुबह हो चाहे शाम

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  2. वह .......... क्या बात कही है .. सच में आलसी हैं ,... अछा लिखा है

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  3. आलसी राम को सुन्दर रचना के लिये बधाई

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  4. "खुशियाँ चूमें कदम हमारे चाहे सुबह हो चाहे शाम।"

    दुनिया भर के आलसियों को भगवान सुबुद्धि दें।
    शुभ-कामनाएँ।

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  5. हे ईश्वर तू दे हमें, कर्मठता का वरदान

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  6. धड़ाधड़ लिखते जा रहे हैं..ऐसे आलसीराम भले.

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  7. ये तो अजगर करे न चाकरी ,पंछी करे ना काम .... से भी बढकर चाह दिया आलसीराम ने :)))

    मजेदार रहा ...तथास्तु !!

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  8. आपकी ६ की ६ ख्वाईशें अति मनभावन हैं. सुन्दर प्रस्तुति.

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  9. आलसी राम का परिचय खासा पसंद आया.
    बधाई.

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  10. वाह रे आलसी राम बहुत बढ़िया,
    पर इतनी सुंदर कविता लिखने की जहमत काहे को उठा लिए..और बढ़िया लिख भी दिए..
    तो बधाई भी स्वीकारे..

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  11. आप सभी ब्लोगर मित्रों का मेरा हौसला बढाने के लिए दिल से धन्यबाद!!

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