सोमवार, 3 अगस्त 2009

दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है


दिल से टकराती है जब तेरी याद आती है
दिल को तडपती है जब तेरी याद आती है

छाया हुआ है अँधेरा दिखता नहीं है सवेरा
तबियत घबराती है जब तेरी याद आती है

दिल है भारी भारी झूठ नहीं कसम तुम्हारी
दिल को तरसाती है जब तेरी याद आती है

देख रहा हूँ तेरी राहें फैला कर अपनी बाहें
साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है

14 टिप्‍पणियां:

  1. bahut achhi rachnaa
    bahut badhaai !

    छाया हुआ है अँधेरा दिखता नहीं है सवेरा
    तबियत घबराती है जब तेरी याद आती है।
    waah !

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  2. बहुत ही सुन्‍दर रचना आभार्

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  3. मेरी साँसें रूक जाती है।
    जब याद तुम्हारी आती है।
    बहुत बढ़िया।

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  4. साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है।
    बेहतरीन

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  5. छाया हुआ है अँधेरा दिखता नहीं है सवेरा
    तबियत घबराती है जब तेरी याद आती है।

    Prem ki ati sundar abhivyakti..
    badhayi..

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  6. देख रहा हूँ तेरी राहें फैला कर अपनी बाहें
    साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है

    यही तो प्रेम है.......... ऐसा होता है जब ishq लग जाता है

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  7. isaq me wo sabhi harakate hoti hai jo aapane wyaan kari hai .......isaq hi to hai .....bahut hi sundar

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  8. नमस्कार प्रेम जी बहुत ही खूब मेरा प्रणाम स्वीकार करे
    देख रहा हूँ तेरी राहें फैला कर अपनी बाहें
    साँस आती जाती है जब तेरी याद आती है।
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  9. बहुत सुन्दर और सहज अभिव्यक्ति है बधाइ

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  10. बहुत सुन्दर और सहज अभिव्यक्ति है बधाइ

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  11. आप सभी ब्लोगर मित्रों का मेरा हौसला बढाने के लिए दिल से धन्यबाद!!

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  12. बहुत रोमांटिक ग़ज़ल कही है प्रेम जी...वाह...बहुत खूब...
    नीरज

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