शनिवार, 1 अगस्त 2009

भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है


भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है।
इसीलिए सभी को यहाँ पर कष्ट ही कष्ट है।

आजकल कोई भी किसी की सुनता ही नहीं
क्योंकि हरकोई अपने आप में हुआ मस्त है।

हमेशा सत्य ही जीतता यह किताबों में पढ़ा
मगर आज तो झूठ जीते यह हो रहा पुष्ट है।

हर कोई तो सितमगर है यहाँ अपने आप में
सितम करके इन्सां कितना बन गया दुष्ट है।

समा गई अशांति आज हर दिलो दिमाग में
जिससे भी बोलिये उसमें झलकता स्पष्ट है।

कोई अगर किसी से निभाए तो कैसे निभाए
बिना बात के ही हर कोई हर किसी से रुष्ट है।


7 टिप्‍पणियां:

  1. कोई अगर किसी से निभाए तो कैसे निभाए
    बिना बात के ही हर कोई हर किसी से रुष्ट है।
    बहुत सुन्दर गजल कही है आपने प्रेम जी.
    बधाई .
    - विजय

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर कोई तो सितमगर है यहाँ अपने आप में
    सितम करके इन्सां कितना बन गया दुष्ट है।


    -बढ़िया है, प्रेम भाई!

    उत्तर देंहटाएं
  3. हमेशा सत्य ही जीतता यह किताबों में पढ़ा
    मगर आज तो झूठ जीते यह हो रहा पुष्ट है।
    यथार्थ चित्रण ---
    सुन्दर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. "भ्रष्टाचार फैला हुआ क्योंकि शासन भ्रष्ट है।
    इसीलिए सभी को यहाँ पर कष्ट ही कष्ट है।"

    अच्छी वेदना प्रस्तुत की है।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप सभी ब्लोगर मित्रों का मेरा हौसला बढाने के लिए दिल से धन्यबाद!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. aaj dubaara padhaa isliye do baar tippani..waah waah
    waah
    हमेशा सत्य ही जीतता यह किताबों में पढ़ा
    मगर आज तो झूठ जीते यह हो रहा पुष्ट है।
    _________bahut khoob !

    उत्तर देंहटाएं