गुरुवार, 30 जुलाई 2009

कोई नहीं है हमारा यहाँ


कोई नहीं है हमारा यहाँ ,
है
मतलबी यह सारा जहाँ।

जिसको हमने अपना बनाया,
समझा
उसने पराया यहाँ।

कहने को सब रिश्ते नाते,
होते
तब तक जब तक खाते

मानो या मानो कोई यह,खाब्बुओं का है मारा जहाँ।
बेदर्दों की यह दुनिया है,
दुनिया
भी क्या यह दुनिया है

जब भी देखा आजमाकर के,
मिलता
नहीं है सहारा यहाँ।

अपनी होगी दुनिया कभी,
चाहे
मिटादो अपनी जिन्दगी

कहते कुछ भी बनता नहीं है,
जीवन
बड़ा ही बेचारा यहाँ


9 टिप्‍पणियां:

  1. कोई नहीं है हमारा यहाँ ,
    है मतलबी यह सारा जहाँ।
    जिसको हमने अपना बनाया,
    समझा उसने पराया यहाँ।

    सही कहा है।

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  2. कहने को सब रिश्ते नाते,
    होते तब तक जब तक खाते
    मानो या न मानो कोई यह,
    खाब्बुओं का है मारा जहाँ
    बिलकुल सही आभिव्यक्ति है आभार्

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  3. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति आभार्

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  4. बेदर्दों की यह दुनिया है,
    दुनिया भी क्या यह दुनिया है
    बहुत बढिया प्रेम जी दुनिया का सच यही है.

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  5. sach kaha.........ye duniya kisi ki nhi hai chahe kuch bhi kar lo khud ko mita do chahe...........bahut khoob.

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  6. मेरा हौसला बढाने के लिए आप सभी ब्लागर मित्रों का दिल से धन्यबाद !!

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