गुरुवार, 30 जुलाई 2009

ऊधौ उठि जाउ तुम अब हमारे सामने से


ऊधौ उठि जाउ तुम अब हमारे सामने से
ऐसी बातें करत तुम को नहीं शरम आवे।
हमारे तो हिय में कन्हैया की मूरत बसी है
ब्रह्म उपासना बताउ हमें कौन जतन भावे।
गोपियाँ तो ऊधौ से खूब खिसियाती जाती
पर ऊधौ ज्ञान गठरी अपनी खोलत जावे।
कहे प्रेम बोली मिलि गोपियाँ सब ऊधौ से
अंधी तो तब जाने जब भरि बाँहों में आवे।

7 टिप्‍पणियां:

  1. कहे प्रेम बोली मिलि गोपियाँ सब ऊधौ से
    अंधी तो तब जाने जब भरि बाँहों में आवे।
    ....Prem aur bhakti ka sundar samanvay.

    "युवा" ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

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  2. सावन का महीना और इतना बढ़िया कवित्त,
    ये कमाल तो सिर्फ प्रेम नारायण शर्मा ही
    कर सकता है।
    बधाई।

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  3. सुन्दरम् - प्रेम भाई।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  4. उद्धव प्रसंग शास्वत है.
    सुन्दर

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  5. lajawaab.........iske baad to shayad kuch kahne kio himmat hi nhi ho rahi.

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  6. मेरा हौसला बढाने के लिए आप सभी ब्लागर मित्रों का दिल से धन्यबाद !!

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