बुधवार, 8 जुलाई 2009

अब देखना यह है कि वो आख़िर क्या करते हैं


अब देखना यह है कि वो आख़िर क्या करते हैं
ठुकराते हैं कि मुहब्बत का हक़ अदा करते हैं

वो मेरी मरज जान के भी अनजान से बने हुए
दवा कि जगह पास आकर सिर्फ़ दुआ करते हैं

वो बसे हुए हैं इस तरह मेरे दिलो- दिमाग में
जफा भी करते तो लगता है कि वफ़ा करते हैं

उन्हें मनाओ तो वो मनाये नहीं मनते मुझसे
पता नहीं कि हम आख़िर क्या खता करते हैं

अब इस के सिवा कोई काम नहीं है मेरे पास
हर हाल में बस उनकी ही माला जपा करते हैं

रात भर सो नहीं पाते उनके ख्यालों में डूब कर
कोई राह नज़र नहीं आती हाथ मला करते हैं

लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं

20 टिप्‍पणियां:

  1. ashiqon ka yahi haal hota hai,

    gam mile to bhu salamati ki dua karate hai..

    har saja-e-pyar ko tahe dil se saha karate hai..

    bahut khub darshaya aapne
    pyar se bhare gazal ke liye badhayi..

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  2. लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
    जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं।

    बहुत ही लाजवाब प्रस्‍तुति आभार्

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  3. itani sundar rachana hai ki uasame bhawanaye kut kut kar bhari padi hai

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  4. उन्हें मनाओ तो वो मनाये नहीं मनते मुझसे
    पता नहीं कि हम आख़िर क्या खता करते हैं।

    -बहुत सुन्दर!!

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  5. वैसे मेरी तो दुआ यही है कि वो हक अदा करें। बाकी रब की मर्जी।
    शानदार गजल, बधाई स्वीकारें।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  6. लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
    जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं।
    प्रेम जी
    बहुत सुन्दर रचना

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  7. वो बसे हुए हैं इस तरह मेरे दिलो- दिमाग में
    जफा भी करते तो लगता है कि वफ़ा करते हैं।

    वास्तव में दिल को छूने वाले भाव हैं।
    बधाई।

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  8. लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
    जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं।
    आपका हल्का फुल्का रोमानी अंदाज़ दिलकश है...वाह.
    नीरज

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  9. उन्हें मनाओ तो वो मनाये नहीं मनते मुझसे
    पता नहीं कि हम आख़िर क्या खता करते हैं।

    just to say Wah !!

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  10. आप सभी का दिल से शुक्रिया !!!!

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  11. बहुत सुंदर भावनाओं के साथ अपने हर एक लाइन इतना सुंदर लिखा है कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती! बहुत खूब प्रेम जी!

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  12. 'वो बसे हुए हैं इस तरह मेरे दिलो- दिमाग में
    जफा भी करते तो लगता है कि वफ़ा करते हैं।'

    -प्यार में ऐसा ही होता है.

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  13. waah waah ........kya khoob likha hai ...har bhav dil ko choo gaya.

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  14. प्रेम जी,

    प्रेम के सभी रंगों में बड़े ही प्रभावी रूप से लिखते हैं आप।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  15. प्यारे प्रेम भाई,
    आप प्लीज़ बुरा मत मानिएगा। हमारे एक दोस्त हैं जनाब प्रेम फ़र्रुख़ाबादी। साहब आज वो आपसे कई गुना बेहतर ग़ज़ल कह गए हैं। बहुत बहुत बहुत लाजवाब। हा हा।
    आज बहुत ख़ूब बात कही-
    उन्हें मनाओ तो वो मनाये नहीं मनते मुझसे
    पता नहीं कि हम आख़िर क्या खता करते हैं। अहा !
    आभार।

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  16. लगता मुझसे प्यार नहीं करते वो पर फ़िर भी
    जब भी मिलते हैं लगता मुझपे मरा करते हैं।

    बहु खूब।

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