मंगलवार, 7 जुलाई 2009

जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ


जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ
मुस्कराए हुए मुझे एक ज़माना हुआ

जी रहा हूँ तड़प कर उसकी जुदाई में
यह दिल मेरा उजड़कर वीराना हुआ

बड़े दिल से रखा था मुहब्बत में कदम
क्या कहूँ खामखा खुदको रुलाना हुआ

किसी को मिले कभी ऐसी बेवफाई
जीते जी मेरा तो बस मर जाना हुआ






13 टिप्‍पणियां:

  1. kya khub likha aapne mohbbat par geet,
    hame padhe aise geet bhi jamana hua..

    pyar ka arth aise samjhaya aapne,

    mai aap ke kavita ka diwana hua..

    dhanywaad

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  2. जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ।
    मुस्कराए हुए मुझे एक ज़माना हुआ।


    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति, आभार्

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  3. बहुत खूब प्रेम भाई।

    जिन्दगी में वेवफाई हो भी जाये गम नहीं।
    प्रेम है तो गम सही जीने का बहाना हुआ।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  4. जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ।
    मुस्कराए हुए मुझे एक ज़माना हुआ।
    बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति है आभार्

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  5. जी रहा हूँ तड़प कर उसकी जुदाई में
    यह दिल मेरा उजड़कर वीराना हुआ
    judaai की tadap तो aishi होती है........... lajawaab लिखा है

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  6. बहुत ही सुन्दरता से हाले दिल का दर्द आपने बयान करी है .....सुन्दर

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  7. आपकी हर एक रचना इतनी सुंदर है कि जितनी भी तारीफ की जाए कम है! लिखते रहिये!

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  8. आप सभी का दिल से शुक्रिया !!!!

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  9. जब से जिन्दगी से उसका जाना हुआ।
    मुस्कराए हुए मुझे एक ज़माना हुआ।
    सुन्दर भाव --

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