शुक्रवार, 3 जुलाई 2009

गरीबी नहीं मिट रही तो क्या गरीब तो मिट रहे हैं


गरीबी नहीं मिट रही तो क्या गरीब तो मिट रहे हैं
जो नहीं मिटे वो जिंदगी में जैसे तैसे घिसट रहे हैं

राज नेता जो कहते अक्सर वो किया नहीं करते
मगर गरीबी पर बयान देकर वो हमेशा हिट रहे हैं

गरीबों पर रहम दिखाया गया पर किया नहीं गया
सदियों से ही पिटते आए और आज भी पिट रहे हैं

कहना कुछ करना कुछ यही फंडा है राजनीति का
नेता यही फंडा अपना कर मकसदों में फिट रहे हैं


11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही भावपूर्ण रचना प्रेम जी . बधाई.

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  2. यह सब हमारे प्रिय भाई प्रेम फ़र्रुखाबादी ही कह सकते हैं जी। वाह वाह क्या कहना !

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  3. कहना कुछ करना कुछ यही फंडा है राजनीति का
    नेता यही फंडा अपना कर मकसदों में फिट रहे हैं।

    -सही कहा!!

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  4. गरीबों पर रहम दिखाया गया पर किया नहीं गया
    सदियों से ही पिटते आए और आज भी पिट रहे हैं।

    बहुत अच्छा लिखा।
    बधाई।

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  5. Bahut sundat bhavabhivyakti...badhai !
    "शब्द सृजन की ओर" के लिए के. के. यादव !!

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  6. सत्यवचन.... बहुत बढ़िया रचना

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  7. गरीबी हटाने का यह नारा इंदिरा जी ने दिया था. अब उनकी तीसरी पीढी क्या कर पाती है - यह देखना है.

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  8. इतना ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने कि मैं तो निशब्द हो गई! आपकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है!

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  9. आप सभी का दिल से शुक्रिया !!!!

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