शुक्रवार, 26 जून 2009

कर लो यकीं मुझ पर जानम


करलो यकीं मुझ पर जानम प्यार हमारा झूठा नहीं।
इतना सताया तुमने फ़िर भी दिल हमारा टूटा नहीं।

कसम तुम्हारी तुम क्या जानो कितना तुम को चाहें
जिस पल याद नहीं आई ऐसा पल कोई छूटा नहीं।

एक दिन आएगा जब तुम महसूस करोगी मुझको
मुझको पता मेरा मुकद्दर अब तक मुझसे रूठा नहीं।

जब तक साँस रहेगी मेरी तब तक तुमको चाहेंगे
यूँ तो देखे लाखों हसीं पर तुझसा कोई सूझा नहीं।

तुम हो मेरी पहली चाहत तुम को कैसे भूल जायें
तुम हो प्यार की फुलवारी सिर्फ़ प्यार का बूटा नहीं।


7 टिप्‍पणियां:

  1. जिस पल याद न आई ऐसा पल कोई छूटा नहीं।

    बहुत सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति, बधाई

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  2. करलो यकीं मुझ पर जानम प्यार हमारा झूठा नहीं।
    इतना सताया तुमने फ़िर भी दिल हमारा टूटा नहीं।
    bahut khub bhaaee ............kya sher likhi hai...

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  3. तुम हो मेरी पहली चाहत तुम को कैसे भूल जायें
    तुम हो प्यार की फुलवारी सिर्फ़ प्यार का बूटा नहीं।

    सुन्दर और समर्पण का भाव लिए अच्छी रचना है.............. मधुर एहसास से भरी

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  4. tum ho pahli phulwari...........................

    wah prem ji, bahut badhiaban padi hai rachna. badhai.

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  5. बहुत ही शानदार रचना लिखा है आपने!

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