गुरुवार, 7 मई 2009

दो दिन के बाद महमान महमान नहीं होता


चाहने पर अक्सर किसी का मान नहीं होता।
दो दिन के बाद महमान महमान नहीं होता।

बहुत पापड बेलने पड़ते हैं जिन्दगी में यारो
यूँ ही पूरा दिल का कभी अरमान नहीं होता।

कोई न कोई स्वार्थ जरूर देखती है ये दुनिया
खामखा कोई किसी पर महरबान नहीं होता।

सच्चे मन से जो करते रहते दूसरों का भला
उनका बेकार कभी कोई अहसान नहीं होता।

नफरतों का परिणाम होता है बड़ा ही घातक
मुसीबतों में कोई उनके दरमियाँ नहीं होता।

जीने को जीते रहते हैं वो भी अपनी जिन्दगी
जिन्हें कभी नसीब जमीं आसमान नहीं
होता।

6 टिप्‍पणियां:

  1. जीने को जीते रहते हैं वो भी अपनी जिन्दगी
    जिन्हें कभी नसीब जमीं आसमान नहीं होता।

    Bahut khub.

    उत्तर देंहटाएं
  2. चाहने पर अक्सर किसी का मान नहीं होता।
    दो दिन के बाद महमान महमान नहीं होता।
    जीने को जीते रहते हैं वो भी अपनी जिन्दगी
    जिन्हें कभी नसीब जमीं आसमान नहीं होता।


    अच्छे दार्शनिक शेर

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut khoob likha he aapne janab//
    जीने को जीते रहते हैं वो भी अपनी जिन्दगी
    जिन्हें कभी नसीब जमीं आसमान नहीं होता।
    is sher me jyada vazan lagaa nujhe//vese to saare hi behtreen he///

    उत्तर देंहटाएं