रविवार, 19 अप्रैल 2009

बड़े दिनों के बाद मिली उनकी चिट्ठी आज


बड़े दिनों के बाद मिली उनकी चिट्ठी आज।
सच पूछो तो मेरी सहेली खुल गए मेरे भाग।
खुल गए मेरे भाग जरा इसको पढ़ के सुनाओ
क्या- क्या लिखा है इसमें मुझको बतलाओ।

कहे प्रेम कविराय बोली सहेली न हो बेकरार
कल आ रहे हैं वो तेरे और तुझको भेजा प्यार।

सुन कर इतनी बात खुश वो इतनी हो गई।
हाय पल भर में ही वो न जाने कहाँ खो गई।
न जाने कहाँ खो गई चिट्ठी दिल से लगाये
बोली कल आ जायेंगे मेरे वो मेरी सहेली हाय।
कहे प्रेम कविराय मिलन अब तो होगा उनका
भाई देर सुबह तक सोयेंगे वो दोनों बे खटका।


2 टिप्‍पणियां:

  1. खुशी में खोते हैं सभी रखना होगा होश।
    पिया मिलन की आस में न होना बेहोश।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने!

    उत्तर देंहटाएं