सोमवार, 30 मार्च 2009

उसने अपना चेहरा छुपा रखा है


उसने अपना चेहरा छुपा रखा है,
फूलों का हंसीं पहरा लगा रखा है।

बहुत ही अच्छे हैं उसके विचार 
सिर्फ विचारों से बहला रखा है

ख़ुद तो सो जाते चादर ओढ़के, 

किसी को रात भर जगा रखा है।

बखूबी समझते वो दुनियादारी,
सारी दुनिया को झुका रखा है।

उसका क्या होगा यह तो बताओ
जिसने अपना सब लुटा रखा है।
पाप लगेगा इतना समझ लेना,
एक दीवाने दिल को दुखा रखा है।



7 टिप्‍पणियां:

  1. उसका क्या होगा यह तो बताओ
    जिसने अपना सब लुटा रखा है।
    बहुत ख़ूब प्रेम साहब !

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  2. सुखद कोशिशें जारी रहें हमेशा
    पाप लगेगा इतना समझ लेना
    एक दीवाने दिलको दुखा रखा है।

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  3. चेहरा छिपा लिया है,

    उन्होंने हिजाब में।

    दिल को दुखा दिया है,

    बड़ा ही जनाब ने।

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  4. उसने अपना चेहरा छुपा रखा है।
    फूलों का उसपे पहरा लगा रखा है।

    बहुत सुन्दर रचना . मन को छू गई . धन्यवाद.

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