गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

कोई अपना नहीं तो खुद अपने बनो




जब दिल से बात करो तो लोग दिमाग से सुनते हैं। जब दिमाग से बात करो तो लोग दिल से सुनते हैं। स्वर मिलाओ तो स्वर नहीं मिलते । अपना बनाओ तो अपने नहीं बनते हैं।अगर बन भी गए तो आगे चलकर मुसीबत बनते है। यह दुनिया एक तलाश घर हैं। जब तक तलाश पूरी न हो जाये तलाशते रहो । यह तलाश ही जिन्दगी है। कभी कभी इस तलाश में आदमी जीत भी जाता है मगर हारता जादा है। जीत के अपने अपने तरीके हैं किसी का तरीका किसी दूसरे को जमता नहीं। एक अजीब सी उलझन में आदमी न चाहते हुए उलझ सा जाता है । कोई भी इस जिन्दगी में इस मनोदशा से अछूता नहीं है। जिन्दगी जीने का कोई एक पैमाना नहीं है। शायद इसी का नाम जिन्दगी है। जहाँ तक मैं समझता हूँ। इस दुनिया में हजारों नहीं लाखों नहीं बल्कि अनगिनत स्वभाव के लोग है। कभी कभी अपने मन के लोग सारी उम्र नहीं मिलते। समझ में ही नहीं आता कहाँ से शुरू करुँ कहाँ ख़त्म करुँ। कभी कभी सारी दुनिया को समझने के चक्कर में हम इतने उलझ जाते हैं कि ये दुनिया ही बेगानी लगने लगती है। आदमी कभी थक जाता है तो कभी थका दिया जाता है। एक कहावत से मैं काफी प्रभावित हूँ। " कि जिन्दगी में खुश रहना बहुत सरल है पर सरल रहना बहुत कठिन है "। शायद जिन्दगी का रहस्य इसी कहावत में छिपा नज़र आता है। जिन्दगी समझने से कभी समझ में नहीं आती क्योकि हम ज्ञान के समुन्दर में इतने उलझ जाते हैं कि जिन्दगी से काफी दूर चले जाते है।अंत में यही दूरी हमारी निराशा का कारन बन जाती है। फिर भी इस कारन को हम समझ के समझना नहीं चाहते हैं । शायद हमारी यही जिद हमारे हर दुःख का कारन बन जाती है।
राम लाल और उसका पडोसी



रामलाल के घर में घुस कर कुछ लोगों ने चोरी कर ली । चोरी करके चोर जैसे ही भाग रहे थे, उनमें से एक चोर पकड़ गया। चोर रामलाल का पडोसी ही था जिसने चोरी करवाई थी। रामलाल जोर जोर से चिल्लाके कहने लगा की मेरे घर में चोरी हो गयी। चोर बहुत नुकसान कर गए। रामलाल के घर वालों ने कहा की हम लोग भी उसके घर में चोरी कर लेते हैं। रामलाल अपने घर वालों से बोला हम चोरी नहीं करेगे बल्कि गाँव को यह बतायेगे की देखो मेरा पडोसी ठीक नहीं है । रामलाल का चिल्लाना सुनके गाँव वाले धीरे धीरे इकठ्ठे होने लगे और कहने लगे कि रामलाल आपके साथ गलत हुआ । रामलाल फिर बोला देखो मेरा पडोसी ठीक नहीं है इसको इस गाँव में नहीं रहना चाहिए । यह आये दिन मेरे घर में चोरियां करवाता रहता है। यह इस गाँव में रहने लायक नहीं है। पडोसी बोला हमने चोरी नहीं की, आप हम पर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं। महीनो रामलाल सबसे शिकायत करता रहा। उसकी किसी ने नहीं सुनी ,बल्कि उसके घर आ के सब चाय पानी कर जाते। रामलाल अपने पर बहुत खुश था कि पूरा गाँव मेरे साथ है मेरा पडोसी अकेला पड़ गया और उसे इस गाँव से निकाल दिया जायेगा। सच तो यह कि पडोसी गाँव में ठाट से रह रहा है । बल्कि रामलाल सबके सामने तमाशा सा बन गया। रामलाल सोच रहा है कि गाँव वाले पडोसी को गाँव से निकाल दें, पर गाँव वाले सोचते हैं कि चोरी तो रामलाल के घर हुई रामलाल जाने । ये तो सब चलता ही रहता है। न तो रामलाल पंगा लेना चाहता है और नहीं ही गाँव वाले। रामलाल सोच रहा है क्या करें क्या न करें। रामलाल मन ही मन सोचता है कि वक्त हर घाव को भर देता है । वक्त बीतेगा सब ठीक हो जायेगा। रामलाल दूर कि सोच रहा है । रामलाल मेरे ख्याल से आने वाले वक्त में गलत साबित नहीं होगा। लोग सब कुछ भूल जायेगे।
चलो आज मिलके कोई गीत गायें

चलो आज मिलके कोई गीत गायें।
गीत गाके सबको मन मीत बनायें।

जीवन की जंग जो हारने लगे
अपने आपको जो मारने लगे
आज उनके जीवन में प्रीति जगायें।

आदमी जो सबसे मिलके रहे
जीवन में सदा वो खिलके रहे
यही सबको जीने की रीति सिखाएं।

अपनों से जो कभी रूठते नहीं
हौसले उन के कभी टूटते नहीं
हौसले जो रखते वो ही जीत जायें।


6 टिप्‍पणियां:

  1. अपनों से जो कभी रूठते नहीं
    हौसले उन के कभी टूटते नहीं
    हौसले जो रखते वो ही जीत जायें।
    " जिन्दगी की अच्छी व्याख्या की आपने अपने इस आलेख मे......जिदंगी एक पहेली सी लगती है....कभी लगता है सुलझ गयी.....कभी इतनी उलझ जाती है एक चक्रव्यू के समान लगती है......जिन्दगी के प्रति ये उपर लिखी पंक्तियाँ सार्थक लगती हैं.....हौसला है तो सब कुछ है......वरना कुछ भी तो नही.."

    Regards

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  2. अपनों से जो कभी रूठते नहीं
    हौसले उन के कभी टूटते नहीं
    हौसले जो रखते वो ही जीत जायें।

    --बहुत सधा हुआ सारगर्भित आलेख. रामलाल जैसे न जाने कितने पंगा न लेने के चक्कर में इसी मृगमरीचिका में जीवन गुजार देते हैं.

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  3. 'आदमी जो सबसे मिलके रहे


    जीवन में सदा वो खिलके रहे


    यही सबको जीने की रीति सिखाएं।'
    -सच्ची सीख.

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  4. गीत गाते रहो, गुनगुनाते रहो,
    एक दिन मीत संसार हो जायेगा।

    चमचमाते रहो, जगमगाते रहो,
    एक दिन प्रीत उपहार हो जायेगा।।

    कृपया शब्द पुष्टिकरण हटा दें।
    टिप्पणी पोस्ट करने में दिक्कत होती है।

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  5. प्रेम जी,

    हौसले से ही तय होती है मंजिल
    भला कब साथ दिया हवा ने मस्तूलों का

    बड़ी ही अच्छी रचना बन पड़ी है.

    मुकेश कुमार तिवारी

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  6. चलो आज मिलके कोई गीत गायें।
    गीत गाके सबको मन मीत बनायें।
    जीवन की जंग जो हारने लगे
    अपने आपको जो मारने लगे
    आज उनके जीवन में प्रीति जगायें....

    Waah bhot acche bhav hai rachna ke ..Bdhai...!!

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