शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2009

हित दिखाकर भी लोग अहित कर देते हैं



हित दिखाकर भी लोग अहित कर देते हैं।
अनादर भी कभी आदर सहित कर देते हैं।

दुश्मनों के रूप कौन जान पाया आज तक
जिस रूप में भी आते व्यथित कर देते हैं।

चरित्रवान कोई लाख बनना चाहे दुनिया में
ऐसे भी लोग जो आ के पतित कर देते हैं।

कितना भी सोच समझ कर फैसला कर लो
फ़िर भी राय लो, लोग भ्रमित कर देते हैं।

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह




किसानो के मसीहा और दलितों के सहारा 
केवल चौधरी चरण सिंह हिन्दोस्तां में थे। 
शोषण के खिलाफ उनका कडा विरोध था 


सुधारकों की वो एक महान दास्ताँ में थे। 
किसानो का दुःख वो समझते थे दिल से 


क्योंकि हिन्दोस्तां के वो एक किसां में थे। 
शोषण प्रेमी और अत्याचारी थे चारों ओर
पता न था उन्हें वो एक ऐसे जहाँ में थे।




युग प्रवर्तक पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी




यह रचना तब लिखी गई जब वह प्रधान मंत्री थे।


भारत को किसी से कोई खतरा नहीं प्यारे
क्योंकि अब शासन अटल जी के हाथ है।
उनकी सूझ-बूझ जग से ही निराली लगे
देख कर हर कोई कहे वाह क्या बात है।
दांतों तले ऊँगली दबाली है विरोधियों ने
अजीब यह शख्श सब को दे रहा मात है।
बड़ा ही कठिन आंकना उनकी महानता को
जिधर रुख करें उधर टलती मुशकिलात है।

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना


कहने वाले कहते हैं पर कैसे छोड़ दूँ पीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे कैसे होगा जीना।
मुझे पी लेने दो मुझे जी लेने दो
गरेबां चाक हुआ उसे सी लेने दो
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

तोड़ दिया दिल जिसने मेरा
मोड़ दिया रुख उसने मेरा
लाखों में वो एक थी दिलवर मेरी हसीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

बहक जाऊं तो होना नहीं खफा
पीने वालों की होती यही अदा
इसी अदा में भाता है मुझको जीवन जीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

पीता हूँ तो बस पीता रहता
गम को भुलाकर जीता रहता
जीवन तो पाया मैंने पर पाई कोई खुशीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---

किस से कहूं मैं दिल का रोना
हुआ वो ही है जो था होना
जो भी मेरे संग हुआ हो संग किसी के कभीना।
पियूँ  नहीं तो कोई बतादे---











गुजरा वक्त कभी वापस नहीं आए


गुजरा वक्त कभी वापस नहीं आए।
चाहे कोई चीखे और चिल्लाए।

झड़े फूल कभी खिलते नहीं हैं
गए लोग कभी मिलते नहीं हैं
चाहे कोई सारी उमर बुलाए।
गुजरा वक्त .....


मनालो उनको जो रूठे हैं
मिलालो उनको जो छूटे हैं
ऐसा न हो फ़िर मन पछताए । 
गुजरा वक्त ..... 

वक्त कभी भी रुका नहीं है
किसी के आगे झुका नहीं है 
वक्त का पहिया आगे बढ़ता जाए।
गुजरा वक्त .....

सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

सोच से बनता अमीर आदमी सोच से बनता गरीब





सोच से बनता अमीर आदमी ,सोच से बनता गरीब ।
जैसी जिसकी सोच है ,वैसा उसका बनता नसीब।

कैसे सतायेंगे उसे,दुःख भला दुनिया के
प्यार मुहब्बत से रहता है,जो अपनों के करीब।

जिस थाली में खाए ,उस में ही छेद करे
काम रकीबों का करे ,बनता फिरता हबीब।

दौड़ दौड़ कर फिरे बनाता ,सब के बिगडे काम
इस दुनिया का नहीं वो ,जाने किस दुनिया का जीव।




गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

कोई अपना नहीं तो खुद अपने बनो




जब दिल से बात करो तो लोग दिमाग से सुनते हैं। जब दिमाग से बात करो तो लोग दिल से सुनते हैं। स्वर मिलाओ तो स्वर नहीं मिलते । अपना बनाओ तो अपने नहीं बनते हैं।अगर बन भी गए तो आगे चलकर मुसीबत बनते है। यह दुनिया एक तलाश घर हैं। जब तक तलाश पूरी न हो जाये तलाशते रहो । यह तलाश ही जिन्दगी है। कभी कभी इस तलाश में आदमी जीत भी जाता है मगर हारता जादा है। जीत के अपने अपने तरीके हैं किसी का तरीका किसी दूसरे को जमता नहीं। एक अजीब सी उलझन में आदमी न चाहते हुए उलझ सा जाता है । कोई भी इस जिन्दगी में इस मनोदशा से अछूता नहीं है। जिन्दगी जीने का कोई एक पैमाना नहीं है। शायद इसी का नाम जिन्दगी है। जहाँ तक मैं समझता हूँ। इस दुनिया में हजारों नहीं लाखों नहीं बल्कि अनगिनत स्वभाव के लोग है। कभी कभी अपने मन के लोग सारी उम्र नहीं मिलते। समझ में ही नहीं आता कहाँ से शुरू करुँ कहाँ ख़त्म करुँ। कभी कभी सारी दुनिया को समझने के चक्कर में हम इतने उलझ जाते हैं कि ये दुनिया ही बेगानी लगने लगती है। आदमी कभी थक जाता है तो कभी थका दिया जाता है। एक कहावत से मैं काफी प्रभावित हूँ। " कि जिन्दगी में खुश रहना बहुत सरल है पर सरल रहना बहुत कठिन है "। शायद जिन्दगी का रहस्य इसी कहावत में छिपा नज़र आता है। जिन्दगी समझने से कभी समझ में नहीं आती क्योकि हम ज्ञान के समुन्दर में इतने उलझ जाते हैं कि जिन्दगी से काफी दूर चले जाते है।अंत में यही दूरी हमारी निराशा का कारन बन जाती है। फिर भी इस कारन को हम समझ के समझना नहीं चाहते हैं । शायद हमारी यही जिद हमारे हर दुःख का कारन बन जाती है।
राम लाल और उसका पडोसी



रामलाल के घर में घुस कर कुछ लोगों ने चोरी कर ली । चोरी करके चोर जैसे ही भाग रहे थे, उनमें से एक चोर पकड़ गया। चोर रामलाल का पडोसी ही था जिसने चोरी करवाई थी। रामलाल जोर जोर से चिल्लाके कहने लगा की मेरे घर में चोरी हो गयी। चोर बहुत नुकसान कर गए। रामलाल के घर वालों ने कहा की हम लोग भी उसके घर में चोरी कर लेते हैं। रामलाल अपने घर वालों से बोला हम चोरी नहीं करेगे बल्कि गाँव को यह बतायेगे की देखो मेरा पडोसी ठीक नहीं है । रामलाल का चिल्लाना सुनके गाँव वाले धीरे धीरे इकठ्ठे होने लगे और कहने लगे कि रामलाल आपके साथ गलत हुआ । रामलाल फिर बोला देखो मेरा पडोसी ठीक नहीं है इसको इस गाँव में नहीं रहना चाहिए । यह आये दिन मेरे घर में चोरियां करवाता रहता है। यह इस गाँव में रहने लायक नहीं है। पडोसी बोला हमने चोरी नहीं की, आप हम पर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं। महीनो रामलाल सबसे शिकायत करता रहा। उसकी किसी ने नहीं सुनी ,बल्कि उसके घर आ के सब चाय पानी कर जाते। रामलाल अपने पर बहुत खुश था कि पूरा गाँव मेरे साथ है मेरा पडोसी अकेला पड़ गया और उसे इस गाँव से निकाल दिया जायेगा। सच तो यह कि पडोसी गाँव में ठाट से रह रहा है । बल्कि रामलाल सबके सामने तमाशा सा बन गया। रामलाल सोच रहा है कि गाँव वाले पडोसी को गाँव से निकाल दें, पर गाँव वाले सोचते हैं कि चोरी तो रामलाल के घर हुई रामलाल जाने । ये तो सब चलता ही रहता है। न तो रामलाल पंगा लेना चाहता है और नहीं ही गाँव वाले। रामलाल सोच रहा है क्या करें क्या न करें। रामलाल मन ही मन सोचता है कि वक्त हर घाव को भर देता है । वक्त बीतेगा सब ठीक हो जायेगा। रामलाल दूर कि सोच रहा है । रामलाल मेरे ख्याल से आने वाले वक्त में गलत साबित नहीं होगा। लोग सब कुछ भूल जायेगे।
चलो आज मिलके कोई गीत गायें

चलो आज मिलके कोई गीत गायें।
गीत गाके सबको मन मीत बनायें।

जीवन की जंग जो हारने लगे
अपने आपको जो मारने लगे
आज उनके जीवन में प्रीति जगायें।

आदमी जो सबसे मिलके रहे
जीवन में सदा वो खिलके रहे
यही सबको जीने की रीति सिखाएं।

अपनों से जो कभी रूठते नहीं
हौसले उन के कभी टूटते नहीं
हौसले जो रखते वो ही जीत जायें।


बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

पाने की चाह में खोया बहुत हूँ मैं



पाने की चाह में खोया बहुत हूँ मैं
हंसने की चाह में रोया बहुत हूँ मैं

सागर में मोती हमें भी मिल जायेगे
इसीलिए खुदको डुबोया बहुत हूँ मैं

इंसानियत कहीं बिखर ही न जाये
प्यार में सबको पिरोया बहुत हूँ मैं

कैसे कहूँ कैसे सही है उसकी जुदाई
इन आँखों को भिगोया बहुत हूँ मैं

महक उठे जहाँ फूलों की खुशबू से
फूलों को सचमुच बोया बहुत हूँ मैं

ठुकरा करके वो कहीं न चली जाये
इसलिए नखरों को ढोया बहुत हूँ मैं।



जो जो जब जब होना सो सो तब तब होना है


जो जो जब जब होना सो सो तब तब होना है
बतलाओ किस बात पर रातों की नीदें खोना है।

जो कुछ भी वो करता ठीक ही तो करता
उसकी करनी में तुमको दोष क्यों दिखता
उसका फैसला सच फैसला कैसा रोना-धोना है।

चाहे कुछ भी सोच लो चाहे कुछ भी मान लो
उसके आगे एक चले न तुम इतना जान लो
मानव चाहे कुछ समझे पर वो एक खिलौना है

उसकी शरण में खुदको हमेशा डाल के रखना
जो करें उसकी मरजी हमेशा मान के करना
चिंता अपनी उसको दो क्यों चिंता को ढोना है।


सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

लोक सभा

लोक सभा
सदन की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी । लोक सभा स्पीकर ने कहा , मेंबर राम लाल अपना प्रश्न पूंछे । रामलाल– स्पीकर सर, सदन में शोर होने लगा । रामलाल ने फ़िर कहा, मिस्टर स्पीकर सर, सदन में शोर और जोर से होने लगा । स्पीकर ने कहा शान्ति बनाये रखें । रामलाल ने अब की बार जोर से बोलते हुए कहा, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मैं मन्त्रजी से पूंछना चाहता हूँ गरीबों के …, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर…, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से…, मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मिस्टर स्पीकर सर, मैं आपके मध्यम से मंत्री जी से पूंछना चाहता हूँ कि गरीबों के…लिए…। रामलाल चिल्लाते रहे और उनकी आवाज शोर-शराबे में डूबती गई मगर शोर कम नहीं हुआ । बात नहीं सुनी जा रही थी इस पर रामलाल को सदमा सा लगा और टेबल पर धडाम से गिर गए । एक दम शोर थम गया । लोग रामलाल की ओर दौड़ पड़े । किसी ने देखकर कहा , ही इस नो मोर रामलाल इस नो मोर। थोडी देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया । सब एक दूसरे की ओर देखने लगे, सत्ता पक्ष के सदस्य ने दुःख जताते हुए कहा,अब रामलाल हमारे बीच नही रहे । रामलाल एक जुझारू नेता थे वह हमेशा गरीबों के हित के लए संघर्ष करते रहे । इतिहास उन्हें हमेशा याद रखेगा । उनके बताये रास्ते पर आज से हम सब चलेंगे । इतना सुनते ही रामलाल उठ खड़े हुए और कहने लगे मुझे आप सब बोलने नहीं देते । मेरे रास्ते पर खाक चलेंगे । सारा सदन बोल उठा बोलो रामलाल अब बोलो आप कहना क्या चाहते हो? राम लाल बोलो । रामलाल बोले । मैं यह पूंछना चाहता हूँ की गरीबों की गरीबी दूर करने के लिए मंत्री जी क्या कर रहे है । सारा सदन एक साथ बोला अरे भाई यह भी कोई मुद्दा है । सदन का बहुमूल्य समय गरीबों के ऊपर बरबाद करना बेवकूफी है । बहुत सारे मुद्दे हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए । रामलाल तो लगता पगला गए हैं । अगला प्रश्न, एक मेंबर उठकर बोला सर चाँद पर जाने के लिए सरकार की क्या योजना है । सदन की कारवाही आगे बढ़ गई । गरीबों की कमर की तरह रामलाल की बोली भी टूट कर बिखर चुकी थी । सदन में फ़िर शोर हुआ हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है, इसकी हर हालत में रक्षा होनी चाहिए । सदन की कारवाही समाप्त हो चुकी थी । सभी अपने-अपने घर के लिए चल दिए.....

बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

वैलेंटाइन डे



वैलेंटाइन डे

युवक - युवती
कोई हमें न रोको हम वैलेंटाइन डे मना रहे हैं।
जिन्दगी ऐसे भी जी जाती सबको बता रहे हैं।

सभ्यता के पैरोकार
आप सब खाक वैलेंटाइन डे मना रहे है।
शादी के बाद की चोंच पहले लड़ा रहे है।

युवक - युवती
कुछ नया करके ही जीवन आगे बढ़ता है।
घिसा - पिटा जीने को दिल नहीं करता है।

सभ्यता के पैरोकार
क्यों सभ्यता को मिटटी में मिला रहे हो।
बुनियादों की चूरें सरे आम हिला रहे हो।

युवक -युवती
एक बार ही मिलती है जीवन में जवानी।
वो भी क्या जवानी न हो जिसमें रवानी।

सभ्यता के पैरोकार
जवानी तो हम पर भी कभी आई थी।
मगर ऎसी हरकत न कभी दिखायी थी।

युवक -युवती
आपकी जलन को हम समझ पा रहे हैं।
आप देख के ख़ुद को नहीं रोक पा रहे है।

सभ्यता के परोकार
मान-मर्यादाओं की खिल्ली उड़ा रहे हो।
हरकतों से पशु-पक्षियों को हरा रहे हो।

युवक -युवती
लाइफ को हम मिलकर इंजॉय करेंगे।
टेंस जीवन में हम मिलकर जॉय करेंगे।
किसी का दिल दुखाना मकसद नहीं है।
हद में रहते हैं कभी होते बेहद नहीं है।

सभ्यता के पैरोकार
परदे का जीवन यह परदे में ही रहने दो।
अपने एन्जॉयमेंट को हद में ही बहने दो।
तुम्हारे एन्जॉयमेंट के हम ख़िलाफ़ नहीं हैं।
हदें तो मंजूर हैं मगर बेहदें माफ़ नहीं हैं।


शनिवार, 7 फ़रवरी 2009

फ़िल्म गीतकार आनंद बक्षी


आनंद बक्षी मेरे प्रिय फ़िल्म गीतकार हैं उन पर यह गीत मैंने १५ वर्ष पहले लिखा था ।
मेरा यह गीत शायद ब्लॉगर भाई बहनों को पसंद आए।

गीतकारों में हैं गीतकार आनंद बक्षी
गीत लिखते हैं मजेदार आनंद बक्षी

गीत प्यार से भर देते हैं
जाने क्या जादू कर देते हैं
मस्ती भरते हैं बेशुमार आनंद बक्षी

जो भी सुनते इनके गाने
हो जाते हैं इनके दीवाने
दिल को हरते हैं यार आनंद बक्षी

फिल्मों में ही लिखते खाली
गीत ग़ज़ल और कब्बाली
फिल्मों से करते हैं प्यार आनंद बक्षी


शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009

कोई अपना नहीं तो खुद अपने बनो

जब दिल से बात करो तो लोग दिमाग से सुनते हैं। जब दिमाग से बात करो तो लोग दिल से सुनते हैं। स्वर मिलाओ तो स्वर नहीं मिलते । अपना बनाओ तो अपने नहीं बनते हैं।अगर बन भी गए तो आगे चलकर मुसीबत बनते है। यह दुनिया एक तलाश घर हैं। जब तक तलाश पूरी न हो जाये तलाशते रहो । यह तलाश ही जिन्दगी है। कभी कभी इस तलाश में आदमी जीत भी जाता है मगर हारता जादा है। जीत के अपने अपने तरीके हैं किसी का तरीका किसी दूसरे को जमता नहीं। एक अजीब सी उलझन में आदमी न चाहते हुए उलझ सा जाता है । कोई भी इस जिन्दगी में इस मनोदशा से अछूता नहीं है। जिन्दगी जीने का कोई एक पैमाना नहीं है। शायद इसी का नाम जिन्दगी है। जहाँ तक मैं समझता हूँ। इस दुनिया में हजारों नहीं लाखों नहीं बल्कि अनगिनत स्वभाव के लोग है। कभी कभी अपने मन के लोग सारी उम्र नहीं मिलते। समझ में ही नहीं आता कहाँ से शुरू करुँ कहाँ ख़त्म करुँ। कभी कभी सारी दुनिया को समझने के चक्कर में हम इतने उलझ जाते हैं कि ये दुनिया ही बेगानी लगने लगती है। आदमी कभी थक जाता है तो कभी थका दिया जाता है। एक कहावत से मैं काफी प्रभावित हूँ। " कि जिन्दगी में खुश रहना बहुत सरल है पर सरल रहना बहुत कठिन है "। शायद जिन्दगी का रहस्य इसी कहावत में छिपा नज़र आता है। जिन्दगी समझने से कभी समझ में नहीं आती क्योकि हम ज्ञान के समुन्दर में इतने उलझ जाते हैं कि जिन्दगी से काफी दूर चले जाते है।अंत में यही दूरी हमारी निराशा का कारन बन जाती है। फिर भी इस कारन को हम समझ के समझना नहीं चाहते हैं । शायद हमारी यही जिद हमारे हर दुःख का कारन बन जाती है।

आज जिगर का टुकडा मुझसे दूर चला


बेटी की विदाई पर पिता की भाव भीनी सलाह


आज जिगर का टुकडा मुझसे दूर चला।
कैसे बतलाऊँ मैं दिलको करके चूर चला।

मुबारक हो तुझको नया तेरा जीवन।
खुशियों से महकता रहे तेरा आँगन।

सास-ससुर की सदा सेवा करना
खुशियों से जीवन उनका भरना
भर देंगे खुशियों से वो तेरा दामन।

साजन की ख़ुशी ही समझना खुशी
सँवरती जायेगी यह तेरी जिंदगी
सदा होकर रहेगा वो तेरा साजन।

ससुराल में प्यार सभी को लुटाना
न घुटना कभी न किसी को घुटाना
रिश्ता कायम रहेगा ये तेरा पावन।


छोटी छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए


छोटी छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए।
छोटों को प्यार बड़ों को मान देना चाहिए।

संत के प्रवचन जहाँ कहीं भी हो रहे हों
समय निकाल उनको कान देना चाहिए।

सुनने को देखने को बहुत कुछ मिलता है
जरूरी ग्रहण करें बाकी छान देना चाहिए।

परोपकारियों का आगे आके समर्थन करें
उनकी मदद को चादर तान देना चाहिए।

मन शुध्द और शांत रहेगा मित्रो आपका
श्रध्दा के अनुसार जरूर दान देना चाहिए।

कुछ भी तो नहीं बिगड़ता अपना दोस्तो
जिससे मिलें उसको मुस्कान देना चाहिए।